भिवानीपति-पत्नी के बीच तकरार पूरे परिवार के लिए आफत बन जाती है। दहेज कानून की आड़ में अधिकांश महिलाएं ससुराल पक्ष के उन लोगों को भी जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने में कामयाब हो जाती हैं, जिनका कोई दोष नहीं होता। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने एक ऐसी ही रिपोर्ट पेश की है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि दहेज हत्या व दहेज उत्पीड़न के मामलों में 80 फीसदी निर्दोष लोग गिरफ्तारी का शिकार हो रहे हैं। महिलाओं को इंसाफ देने के लिए लागू की गई भारतीय दंड संहिता की धाराओं 304बी व 498 ए के दुरुपयोग ने ‘कानूनी आतंकवाद’ का रूप ले लिया है।
महिलाएं अपने ससुराल पक्ष के लोगों को ब्लैकमेल करने व फिरौती तक मांगने लगी हैं। एनसीआरबी ने वर्ष 2007 में हुए दहेज हत्या व दहेज प्रताड़ना के आंकड़ों की समीक्षा करने के बाद रिपोर्ट में जो आंकड़े पेश किए हैं, उनके अनुसार कानून की इन दोनों धाराओं की सच्चई कुछ इस प्रकार है।
केवल दहेज प्रताड़ना के मामलों की स्थिति :
एनसीआरबी के अनुसार केवल दहेज प्रताड़ना के मामलों में 92.3 प्रतिशत लोगों की बिना किसी सबूत के गिरफ्तारी हुई। इन्होंने बाद में खुद को निर्दोष साबित करने में सफलता हासिल की।
कौन-कौन हुए प्रताड़ित :
कानून की उक्त दोनों धाराओं में फंसकर जो लोग मानसिक, शारीरिक व आर्थिक तौर पर प्रताड़ित हुए, उनमें पति, बूढ़े सास-ससुर, देवर-देवरानियां, जेठ-जेठानियां, ननद-ननदोई व अन्य करीबी रिश्तेदार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 304 बी के तहत ‘डोरी डेथ’को ‘सॉरी डेथ’ कहना उचित होगा। इसी प्रकार 498 ए को ‘ह्रासमेंट टू वाइफ’ की जगह ‘सॉरी ह्रासमेंट बाई वाइफ’ कहना ठीक रहेगा।
आत्महत्या के आंकड़े भी चौंकाने वाले: एनसीआरबी ने पांच वर्ष के आत्महत्या के आंकड़े पेश कर के नया रहस्योद्घाटन किया है। आंकड़ों में वर्ष 2003 से लेकर 2007 तक 85321 विवाहित लोगों ने आत्महत्या की। इनमें पुरुषों की संख्या 55, 452 और महिलाओं की संख्या केवल 29,869 रही।
ंगत वर्ष मिली आरोपियों को सजा
ट्रायल पूरा किया 78, 292 ने
304बी/498ए में सजा 16, 665 को
केवल 498ए में सजा 5, 144 को
निर्दोष साबित हुए 56, 153 यानी (71.72 प्रतिशत) ऐसे मामले जो किसी
तरह निपटा दिए गए 13, 970
2007 में हुई गिरफ्तारियां
498 ए (दहेज प्रताड़ना) 1, 37, 180
304 बी (दहेज हत्या) 24, 562
कुल 1, 61, 742
आरोप पत्र दायर 1, 25, 277
आरोप ही नहीं लगे 36, 465 (यानि 22.53 प्रतिशत)
(नोट : जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनके मामलों की सुनवाई आने वाले वर्षे में होगी)
कानून के जिन अधिनियमों का अधिक दुरुपयोग हो रहा है, उनमें एससीएसटी, दहेज हत्या व दहेज प्रताड़ना शामिल हैं। प्राय: देखने में आ रहा है कि ससुराल में मामूली विवाद होने पर विवाहिता पूरे परिवार के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज करा देती है। इसी प्रकार नवविवाहिता की शादी के सात साल के भीतर किसी भी कारण से मौत हो जाए तो मायके पक्ष के लोग पूरे ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज करा देते हैं। ससुराल पक्ष के लोगों को ब्लैकमेल किया जाता है। हालांकि कुछ मामले सच्चे होते हैं, लेकिन अधिकांश मामले झूठे सामने आ रहे हैं। पंचायतों व समाज के लोगों को इस बुराई पर अंकुश लगाने के लिए आगे आना चाहिए। —प्रहलाद सिंह जांगड़ा विशेष न्यायिक दंडाधिकारी जिला न्यायालय, भिवानी