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सम्मानजनक न्याय के लिए

चंडीगढ़ बलात्कार जैसा अपराध अक्सर रिपोर्ट हो ही नहीं पाता। शर्म, सामाजिक प्रताड़ना और हमारे दोहरे मापदंड, पीड़िता को आगे आने से रोकते हैं। और यदि हिम्मत करके वह सामने आ भी जाए तो अपराधी को सजा दिलाने की प्रक्रिया इतनी जटिल और तनाव देने वाली होती है कि उसमें फंसना बार-बार बलात्कार जैसा ही लगता है। ऐसे

में दुष्कर्म की सुनवाई महिला जज द्वारा कराए जाने के लिए कानून में होने वाले संशोधन की खबर स्वागत योग्य है। केंद्र सरकार ने यह फैसला कई संगठनों और स्वयं सेवी संस्थाओं की उस मांग के बाद लिया, जिसमें कहा जाता रहा था कि दुष्कर्म की पीड़िता को अपनी बात पुरुष जज के सामने रखने में परेशानी आती है। इस संबंध में क्या कह रहे हैं शहर के जाने-माने और प्रतिष्ठित लोग, आइए जानते हैं:-

क्या-क्या है प्रस्ताव में

इस प्रस्ताव में स्पष्ट है कि पीड़िता के जो भी बयान दर्ज होंगे, वह महिला पुलिस द्वारा उसके घर पर ही होंगे, थाने पर नहीं।

गवाह के मुकरने की स्थिति में उस पर भी मुकदमा चलेगा और उसे दो साल की सजा का प्रावधान है। मामले की सुनवाई महिला जज ही करेगी और हर हाल में इस प्रकार के केसों का निपटारा तीन महीने में ही करना होगा।

पुलिस की भूमिका में भी खोट

कानूनविदों, महिला समर्थकों व चिंतकों का कहना है कि नारी उत्पीड़न में आरोपियों के बच निकलने में लंबी कानून प्रक्रिया और सामाजिक ताने-बाने के साथ-साथ पुलिस की भूमिका भी अहम होती है।

जानकारों का कहना है कि यदि कोई मामला पुलिस के पास जाता भी है तो वह उसे हल्के-फुल्के ढंग से लेती है।

हत्या और बलात्कार को छोड़ दें तो अन्य मामलों में भी लगभग ऐसा ही होता है। शिकायत के बाद जांच प्रक्रिया और फिर एफआईआर दर्ज की जाती है, जबकि होना तो यह चाहिए कि पहले एफआईआर दर्ज हो, फिर आगे की प्रक्रिया। इसमें भी पुलिस अक्सर दबाव में आ जाती है।

आठ फीसदी को ही सजा

वकीलों का कहना है कि राष्ट्रीय आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो नारी उत्पीड़न के मामलों में मात्र आठ फीसदी को ही सजा मिल पाती है। बहुत सारे मामलों में केस ही दर्ज नहीं होते और ९२ फीसदी गुनाहगार आसानी से बच जाते हैं। जिसका कारण पुलिस का नकारात्मक और असहयोगात्मक रवैया और लंबी न्यायिक जांच प्रक्रिया का होना है।

बलात्कार से संबंधित मामलों की सुनवाई अब महिला जज करेगी। यह अच्छी बात है, क्योंकि पीड़ित महिला जज पुरुष जज के सामने अपनी बात नहीं रख पाती थी। साथ ही पुरुष जज पीड़ित महिला के जज्बात उतनी शिद्दत से महसूस नहीं कर पाते जितना कोई महिला। अब पीड़ित महिलाओं की स्थिति में अधिक सुधार होने की गुंजाइश बनेगी और उसे न्याय मिलने की उम्मीद अधिक बढ़ेगी।

-जसविंदर कौर इंचार्ज, वुमन एंड चाइल्ड सपोर्ट यूनिट चंडीगढ़ पुलिस, सेक्टर-17

बलात्कार जैसे घिनौने अपराध की सुनवाई एक महिला जज करेगी। यह बहुत ही अच्छी बात है, क्योंकि इस घटना से बाद किसी भी महिला का मनोबल वैसे ही गिर जाता है, और समाज में भी उसे ही गलत नजरों से देखा जाता है, लेकिन मामले की सुनवाई के समय केवल महिला के जज होने से बात नहीं बनेगी। उनके साथ एडवोकेट और कोर्ट का रीडर भी महिला होनी चाहिए। - संतोष सिंह, सोशल एक्टिविस्ट

महिला जज करेंगी सुनवाई यह फैसला सचमुच में ही स्वागत करने वाला है। यह फैसला काफी पहले हो जाना चाहिए था। बलात्कार होने के बाद बलात्कार के बारे में बताना, महिला के लिए फिर से उसी दर्द से गुजरना होता है। ऐसे में महिला जज होगी तो पीड़ित महिला को काफी सुविधा होगी। पुरुष जज के सामने महिला काफी अजीब महसूस करती हैं।

-वीना कुमारी, एडवोकेट पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट





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