bhaskar Web English
HomeNewsMetrosChandigarh Chandigarh

ठहाकों के बीच टेंशन को किया खत्म

चंडीगढ़फ्रेगरेंस लाफ्टर क्लब ने वल्र्ड लाफ्टर डे के अवसर पर सेक्टर-36 के फ्रेगरेंस गार्डन में कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान फाउंडर मेंबर जनक नरूला ने बताया क्लब को 10 सदस्यों से शुरू किया था। अब इनकी संख्या 100 हो गई है। वहीं क्लब को बने सात वर्ष हो गए हैं।

हंसी के ठहाके गूंजे गार्डन में: वन, टू, थ्री लाफ्टर इज फ्री.. स्लोगन और हो हा हा हा..के ठहाकों के साथ लाफ्टर क्लब के सदस्य बेहद खुश थे। ढोलक की थाप के साथ नाच भी रहे थे। फूल, पत्ते, चिमटियों और पोस्टर से लेडीज ने अपने आभूषण बनाए हुए थे। कार्यक्रम में डीपीआई (स्कूल्स) एस.के सेतिया बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। इस मौके सेतिया की प्रशंसा की गई, जिन्होंने स्कूलों में लाफ्टर सेशन और योग शुरू किया। यहां के.एल भार्गव ने लाफ्टर पर कविता पढ़ी। शीतल सिंह ने शेयर सुनाया। एम.एस दुग्गल और सुरिंद्र सिंह सभ्रवाल को सम्मानित किया गया।

सीनियर सिटीजन हैं अधिक:

फाउंडर ंमैंबर जनक नरूला के अनुसार सीनियर सिटीजन घर में अकेलापन और बीमारी से राहत पाने के लिए पार्क में आते हैं। ऐसे में लाफ्टर क्लब उनके लिए सुख का साथी है, जो उन्हें बीमारियों से बचाता है और लाइफ में इनवॉल्व रखता है। महीने के आखिरी शनिवार को क्लब के सदस्य का बर्थडे भी सेलीब्रेट किया जाता है।

झिझक हो जाती है खत्म:

यूटी के डीपीआई स्कूल्स एस.के सेतिया ने कहा कि जब ग्रुप में लोग इकट्ठे हंसते हैं, तो उनकी झिझक खत्म हो जाती है और शरीर को रिलेक्स मिलता है।

ग्रुप एक्टिविटी में मजा: क्लब के मेंबर सुनील मनोचा ने बताया कि शुरुआती दिनों से लाफ्टर क्लब के मेंबर हैं और यहां आने से स्ट्रेस कम हो गया है। रिटायर विंग कमांडर मनमोहन सिंह ने बताया कि क्लब में आने से उनके जीवन में खुशियां आ गई हैं और छोटी-छोटी बातों को दिल से नहीं लगाते, बल्कि नजरअंदाज कर देते हैं।

जिससे टेंशन उनके करीब नहीं आती। कुलविंदर कौर दुग्गल ने बताया कि अब हम पति-पत्नी झगड़ों को हंसी में टाल देते हैं, जिससे जीवन में खुशियां रहती हैं। बच्चों की बातों को भी गंभीरता से नहीं लेते। रंजना कपूर ने बताया कि बेटे विदेश में रहते हैं और क्लब में आने से उनका अकेलापन दूर हो जाता है। हंसने से बीमारियां भी दूर रहती हैं।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: