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कहीं मजबूरी, कहीं खानदानी पेशा

चंडीगढ़मंदिर, गुरद्वारे या बस स्टॉप के आसपास आपको पांच रुपए, दस रुपए दे-दो. की गुहार लगाते भिखारी अवश्य मिल जाते हैं। कभी आप उनकी हथेली पर कुछ रख देते हैं तो कभी झिड़क कर भगा देते हैं। वास्तव में भिखारियों को पैसा देने की बजाए नजरअंदाज करना चाहिए। उनके पुनर्वास का प्रयास करना चाहिए।

यह बात रविवार को सेक्टर-35 के किसान भवन में यंग इंडिया सोसायटी की ओर से ‘चाइल्ड बेगिंग’ विषय पर सेमिनार के दौरान जानी-मानी एंथ्रोपोलॉजिस्ट और यंग इंडिया से एसोसिएट डॉ. आर. लांबा ने कही। इस सेमिनार में एनजीओ के कार्यकर्ताओं, कॉलेज के स्टूडेंट्स, एडवोकेट, बैंक के कर्मचारियों ने भाग लिया। लांबा ने बताया कि सर्वे के अनुसार चंडीगढ़ में चार हजार भिखारी हैं।

बेरोजगारी के कारण भी बच्चे हाथ फैलाए मंदिरों के बाहर खड़े हो जाते हैं। उन्होंने कई उदाहरण देते हुए बताया कि बच्चों के पेरेंट्स उन्हें भीख मांगने के लिए मजबूर करते हैं, जबकि कई बच्चे कहते हैं कि यह हमारा खानदानी पेशा है। यंग इंडिया के डॉ. एनएस तोमर ने कहा कि चंडीगढ़ से बेगिंग को खत्म करना चाहिए, क्योंकि भिखारी क्राइम को बढ़ाते हैं। यंग इंडिया के फाउंडर परमजीत सिंह ने बताया कि 23 मई को शाम 6.30 बजे प्लाजा में लोगों को जागरूक करता भिखारियों पर नुक्कड़ नाटक मंचित किया जाएगा।

सेमिनार में तय किया गया

>> चाइल्ड बेगिंग को बंद किया जाए। >> भिखारियों का पुनर्वास हो। >> उनको पैसे न दें। >> बच्चों को स्कॉलरशिप देकर स्कूल में पढ़ाएं। >> लोगों में जागरूकता लाएं। >> नुक्कड़ नाटकों का मंचन हो।





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