आईपीएल क्रिकेट में खेल रहे रोहित शर्मा के खेलने की शैली विवियन रिचर्डस जैसी ही है। रोहित के शानदार शॉट्स और कठिन परिस्थितियों में भी उन्हें साहस के साथ बल्लेबाजी करते हुए देखकर मुझे बरबस ही एंटीगुआ के रिचर्डस की याद आ जाती है।
निश्चित रूप से वे सर रिचर्डस के तरह की डीलडौल वाले तो नहीं हैं, पर उनमें जो असाधारण प्रतिभा है उसकी वजह से वो लीग में खेल रहे अब तक के सबसे आकर्षक बल्लेबाज हैं। लांग ऑन और मिड-विकेट के बीच कहीं भी शॉट्स मारने की उनकी क्षमता और उठाकर कवर ड्राइव मारना, ये दो ऐसे स्ट्रोक्स हैं, जिनकी वजह से रिचर्डस से उनकी हमेशा तुलना हो सकती है।
शर्मा के स्ट्रोक्स लगाने की टाइमिंग गजब की है। साथ ही वे सुनील गावसकर और सचिन की तरह गेंदबाज के बिलकुल बगल से स्टेट ड्राइव पूरी कंट्रोल में लगाने की क्षमता रखते हैं। गिलक्रिस्ट, लक्ष्मण, सायमंड्स और अफरीदी से सजी डेक्कन चार्जर्स की टीम में रोहित लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले सबसे आकर्षक और सक्षम खिलाड़ी के तौर पर उभरे हैं। अगर उनके स्ट्रोक्स और स्ट्राइक रेट पर ध्यान दिया जाए तो वे इस बात को गलत साबित करते हैं कि वे अनुभवहीन हैं। बल्लेबाजी के अतिरिक्त शर्मा चुस्त-दुरुस्त क्षेत्ररक्षक भी हैं।
हालांकि अभी इस 21 वर्षीय बल्लेबाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने को साबित करना है। लेकिन शर्मा ने जिस तरह का खेल और क्लास अब तक के मैचों में दिखाया है, उसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि वे देश में 18 से 26 वर्ष की उम्र वाले सबसे प्रतिभाशाली युवा क्रिकेटर हैं।
अगर इस सीरीज में ईशांत शर्मा, रवींद्र जडेजा, शिखर धवन, मनप्रीत सिंह गोनी, अभिषेक नायर (और अगर आईसीएल में खेल रहे आर सतीश, अली मुतर्जा, स्टुअर्ट बिन्नी, मोहम्मद खलील और अंबाटी रायडू को अगर प्रतिबंधित नहीं किया जाता) को भी शामिल किया जाए, तो क्रिकेट के खेल में भारत का वर्चस्व आने वाले समय में निश्चित रूप से बन सकता है। पर जिसका सरताज अभी ऑस्ट्रेलिया बना हुआ है। लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता हैे कि क्रिकेट के इस खेल में भारत का भविष्य उज्ज्वल है।
रोहित की बल्लेबाजी मजबूत परंपरागत तकनीक पर आधारित है, जोकि ट्वेंटी-20 क्रिकेट में बहुत ही मूल्यवान है। रोहित खेल की बारीकियों को जल्दी समझ जाते हैं और चुनौतियों को भी स्वीकार करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वो शॉट्स खेलने से पहले गेंद को अंतिम समय तक देखते हैं। शॉट्स लगाते समय उनका सिर स्थिर रहता है, जिस वजह से वे गेंद को अंतिम समय तक देखकर ही अपना फुटवर्क और शॉट्स का चयन करते हैं।
सचिन तेंडुलकर, महेंद्र सिंह धोनी और वीरेंद्र सहवाग से अलग रोहित शर्मा केवल टीम के एक अन्य बल्लेबाज की तरह नजर आते हैं, जिसने टेस्ट, वनडे और ट्वेंटी-20 क्रिकेट में भारतीय क्रिकेट टीम के ड्रेस को पहना है। उनमें कोई अलग से चमक नजर नहीं आती।
क्या यही बात उन्हें भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा नाम बनाने में कारगर हो सकती है? मैं निश्चित रूप से उस घड़ी का इंतजार करूंगा।