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कर्ज लेने से पहले देख लें, डिफाल्टर तो नहीं बना दिया है आपको

मुंबई. आप होम लोन या क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर कर रहे हों, तब भी आपको लोन लेने में मुश्किलें आ सकती हैं। आपके बैंक ने आपको खराब कर्जदार की श्रेणी में दर्ज कर दिया है तो समझिए अब आपको कहीं से भी लोन नहीं मिलने वाला।

लोगों के कर्ज का इतिहास जानने के लिए बैंकों ने क्रेडिट इंफार्मेशन ब्यूरो (सिबिल) बनाया है। यही सिबिल ग्राहकों के लिए मुसीबत बन गया है। कर्ज की किस्त नियमित चुकाने वालों के नाम भी अगर सिबिल के पास खराब कर्जदार के रूप में दर्ज हो गए हैं, तो उन्हें दूसरी जगहों से लोन लेने में दिक्कतें आ रही हैं।

गलत जानकारी:
कई लोगों के बारे में गलत सूचनाएं दर्ज हो गई हैं। कई बैंकों के बकाया दिखाए गए हैं, जबकि उन्होंने ऐसे कोई क्रेडिट कार्ड लिए ही नहीं। जिन ग्राहकों के बैंकों के साथ समझौते हो जाते हैं, उन समझौतों का जिक्र सिबिल की रिपोर्ट में नहीं किया जाता तब भी समस्या खड़ी हो जाती है।

क्रेडिट इंफार्मेशन कंपनीज रूल्स 2006 के अनुसार किसी भी बैंक को 21 दिन के भीतर सही जानकारी सिबिल के पास भेज देनी चाहिए। अगर बैंक का कर्जदार के साथ कोई समझौता होता है तो बैंक को 30 दिनों के भीतर सिबिल को सूचित करना चाहिए।

जबरिया पालिसी:
विशाल गोहिल नाम के एक शख्स को एक बैंक ने क्रेडिट कार्ड के साथ हेल्थ इंश्योरेंस पालिसी भेज दी। जब गोहिल ने बीमा लेने से इंकार कर दिया तब भी उनके बिल के साथ प्रीमियम भेजा जाता रहा। बाद में उन्हें सिबिल के साथ डिफाल्टर दर्ज करा दिया।

ग्राहक मुश्किल में:
सिबिल ने ग्राहकों को मुश्किल में डाल दिया है। बैंक अगर गलत बकाया भी निकाल रहे हैं तो ग्राहकों को डिफाल्टर के तौर पर सिबिल में दर्ज करा देते हैं।





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