नई दिल्लीकांग्रेस महासचिव राहुल गांधी भले ही आदिवासियों का दिल जितने में कामयाब हुए हों लेकिन भोपाल के 40 गैस पीड़ित बच्चे ऐसे हैं, जो मानते हैं कि राहुल गांधी ने उनका दिल तोड़ा है।
लगातार 38 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे भोपाल गैस पीड़ितों के आंदोलन का फोकस अब गैस प्रभावित बच्चों पर आकर टिक गया है। गैस त्रासदी के कारण जन्मजात बीमारियां लेकर पैदा हो रहे इन बच्चों पर जहरीला पानी सितम ढा रहा है। अपने अभिभावकों के साथ धरने पर बैठे इन बच्चों ने बताया कि उन्हें राहुल गांधी से बड़ी उम्मीदें थी।
3 अप्रैल को वे दस जनपथ पर राहुल गांधी से मिले थे। तब उन्होंने वादा किया था कि वे भोपाल गैस त्रासदी को लेकर सहानुभूति रखते हैं और वे प्रधानमंत्री डा. मनमोहनसिंह से पीड़ितों की मुलाकात करवाएंगे। इतना ही नहीं उन्होंने तो यहां तक कहा था कि जितने भी युवा सांसद हैं वे उनके साथ भी चर्चा कर कोई हल निकालने की कोशिश करेंगे और धरना स्थल पर भी जरूर आएंगे।
गैस प्रभावित दो सौ लोगों के साथ धरने पर बैठी सबसे छोटी 11 साल की यास्मीन खान बताती है कि एक माह से ज्यादा का समय हो गया लेकिन न तो राहुल गांधी धरना स्थल पर पहुंचे और न ही उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात करवाई। गैस पीड़ित संगठन की रचना ढिंगरा बताती हैं कि दो साल पहले तो राहुल गांधी ने चालीस मिनट का समय हम लोगों के साथ गुजारा था और यूनियन कार्बाइड समेत उन कंपनियों का विरोध किया था जो देश में व्यवसाय के बहाने आती है बाद में त्रासदी छोड़ जाती हैं।
परवीन,जबैदा,असलम, महेश कई बच्चें ऐसे हैं जिनके लिए 20 फरवरी से जिंदगी बदल गई है। लगातार 37 दिनों तक अपने अभिभावकों के साथ पैदल चलकर दिल्ली पहुंचे यह बच्चें अब 38 दिनों से जंतर मंतर पर डेरा डाले हुए हैं। अपनी त्रासदी को बयां करते अपने माता पिता के साथ नारे बाजी करना और मंत्रियों से लेकर सांसद तक न जाने कितने अनगिनत लोगों के यहां गुहार लगाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
लैपियर ने किया प्रधानमंत्री से निवेदन
भोपाल गैस त्रासदी पर चर्चित किताब लिख चुके पद्मभूषण से सम्मानित होने वाले लेखक डामनिक लैपियर ने सोमवार को जंतर मंतर पर भोपाल गैस पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने प्रधानमंत्री डा. मनमोहनसिंह से निवेदन किया कि वे इनकी समस्याओं को सुलझाएं। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने स्वयं गैस प्रभावित बस्तियों में जब पानी पिया तो उन्हें गले का संक्रमण हुआ तथा चमड़ी पर चकते उठने लगे। केंद्र सरकार भोपाल की गैस प्रभावित बस्तियों की समस्या का तुरंत निराकरण करे।