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बस्तर की गुफाओं में थे आदिमानव

रायपुरबस्तर की कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान स्थित कुटुंबसर और दंडक गुफाओं में आज से हजारों साल पहले आदिमानव रहते थे। अहमदाबाद स्थित भौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने गुफा के अंदर मिले कोयले तथा अन्न कणों की कार्बन डेटिंग और अन्य परीक्षणों के आधार पर इसकी पुष्टि की है। तब घाटी वासी खेती भी करते थे। कुटुंबसर गुफा की खोज शंकर तिवारी ने 1958 में की थी। फिर 1993 के आसपास दंडक गुफा को फॉरेस्ट विभाग के रेंज ऑफिसर पतिराम तारम और गार्ड रामदास बघेल ने खोजा।

वैज्ञानिक एमजी यादव ने बताया कि देश की किसी अन्य गुफा में मनुष्य के रहने के इतने पुख्ता प्रमाण पहले कभी नहीं मिले। यादव के साथ केएस सारस्वत, आईबी सिंह और आर रमेश भी शोध में शामिल थे। उनका शोधपत्र ‘करंट साइंस जर्नल’ में छपा है। कुटुंबसर गुफा में आज से 6940 से 4030 वर्ष पुराने जबकि दंडक गुफा में 5318 से 5042 वर्ष पुराने कोयले के नमूने मिले हैं। यादव का दावा है कि आदिमानव ने इन गुफाओं का इस्तेमाल आज से 6940 साल से 4030 साल पूर्व के बीच किया।

गुफा के पानी की भी जांच

कुटुंबसर और दंडक गुफा के अंदर रिसने वाले पानी के आधार पर मध्यभारत में दक्षिण-पश्चिमी मानसून के इतिहास की पड़ताल हो रही है। भौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला के वैज्ञानिक एमजी यादव ने बताया कि स्टेलेग्माइट और स्टेलेक्टाइट से भरी गुफाओं में रिसने वाले पानी के आइसोटोप का विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि मौसम में बदलाव किस तरह से आया। जांच करीब एक साल तक चलेगी।





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