लखनऊवाराणसी में गंगा नदी के घाटों पर बड़ी संख्या में मछलियां मृत पाई गई हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि घाटों के किनारे उथले पानी में प्रदूषण बढ़ने व ऑक्सीजन की कमी के कारण ऐसा हो सकता है। शुक्रवार और शनिवार को लगातार दो दिनों तक मछलियां मरी हुई पाई र्गई। यह पहला मौका है, जब वाराणसी के घाटों पर बड़ी संख्या में मछलियां मरी हैं। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि इसकी जांच की जाएगी।
श्रद्धालु दुखी :
गंगा में बढ़ते प्रदूषण, कम होते पानी और मछलियों के मरने की घटना से वाराणसी के पंडित, पुजारी और श्रद्धालु खासे दुखी हैं। पंडित राधेश्याम शास्त्री (80) ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार नदी को इतनी बदहाल स्थिति में देखा है।
गंगा की दुर्दशा :
वाराणसी में सीवर के गंदे पानी को शुद्ध करने के लिए लगे सभी ट्रीटमेंट प्लांट बंद पड़े हैं। यहां हर दिन करीब 150 मिलियन लीटर प्रदूषित पानी सीधे गंगा नदी में बहाया जाता है। 1995 से शुरू किए गंगा एक्शन प्लान पर राज्य सरकार ने सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च किए हैं, फिर भी प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है।