भोपालरविवार को भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन पहुंची। साइंस एक्सप्रेस में मौजूद साइंस संबंधी प्रदर्शनी, उपकरण व मॉडल्स को देखने के लिए बड़ी संख्या में छात्र व अन्य लोग स्टेशन पहुंचे। लोग चाहते थे जल्द से जल्द एक्सप्रेस के अंदर मौजूद प्रदर्शनी तक पहुंचने का अवसर मिले और साइंस से संबंधित जानकारी प्राप्त हो। एक्सप्रेस के संचालन, व प्रबंधन की जिम्मेदारी अहमदाबाद स्थित विक्रम ए साराभाई कम्यूनिटी साइंस सेंटर उठा रहा है। एक्सप्रेस में साइंस प्रदर्शनी का निर्माण मैक्स प्लांक सोसायटी जर्मनी द्वारा किया गया है। एक्सप्रेस पिछले 6 महीने से देशभर में घूम रही है।
एक्सप्रेस के भोपाल पहुंचने पर इसमें मौजूद प्रदर्शनी के शुभारंभ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल डा. बलराम जाखड़, विशिष्ट अतिथि के रूप में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि के कुलपति पीबी शर्मा, मैपकास्ट के पूर्व डायरेक्टर डा. एसएन द्विवेदी, डा. प्रवीण तामोट, साइंस सेंटर(ग्वा) के सचिव अरुण भार्गव, जीवाजी विवि ग्वालियर के पूर्व कुलपति डा. राधारमन दास, जमर्नी की मैक्सप्लेनेक्स सोसाइटी के सदस्य एन्ड्रीयाज क्लॉक, डिवीजन रेलवे मैनेजर अशोक अग्रवाल उपस्थित थे।
4 दिन रुकेगी:
साइंस एक्सप्रेस हबीबगंज स्टेशन के प्लेटफार्म नं दो पर 4 दिन रुकेगी। इसमें मौजूद प्रदर्शनी आम लोगों के लिए सुबह 10 से सायं 4 बजे तक खुली रहेगी।
नहीं लेना होगा कोई टिकट:
इसे देखने आने वालों को प्लेटफार्म या अन्य कोई टिकट नहीं लेना होगा। रेलवे द्वारा लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह छूट चार दिन तक एक्सप्रेस प्रदर्शनी खुली रहने के दौरान ही प्रदान की जाएगी।
मजा आ रहा है:
साइंस एक्सप्रेस के साथ सफर कर रहे एप्लिकेशन इंजीनियर अंकित उपाध्याय पिछले 6 महीने से अपने परिवार से दूर हैं। बावजूद इसके उन्हें बहुत मजा आ रहा है। अंकित इस ट्रेन में मौजूद साइंस उपकरणों की देखभाल करते हैं। वे इस एक्सप्रेस में यूपी से सफर कर रहे हैं व अब तक बिहार, आसाम, नागालैंड, कोलकाता, कर्नाटक, कन्याकुमारी, मुंबई, बेंगलुरु, गुजरात के अलग-अलग शहरों में जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि मैंगलोर से मुंबई तक का सफर सबसे यादगार रहा। वे बताते हैं कि इस दौरान उन्हें विशिष्ट लोगों से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ। अंकित बताते हैं कि कभी कोई परेशानी होती है तो वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए विशेषज्ञों से जर्मनी बात करते हैं। भ्रमण के दौरान उन्हें कई जगह भाषा की दिक्कत आई पर इसी बहाने अलग- अलग भाषा की जानकारी प्राप्त हुई।
कुछ जगह ऐसी भी थीं जहां भोजन की परेशानी हुई। खुशी जाहिर करते हुए वे कहते हैं कि, ‘मेरे कॅरिअर की शुरुआत अच्छी रही इससे मुझे आगे फायदा मिलेगा’। अंकित को एक वाक्या हमेशा याद रहेगा। वे तमिलनाडू में जब वे अपने दोस्तों के साथ घूमने गए तो वापस स्टेशन आने का रास्ता ही भूल गए।
वे बताते हैं कि हम लोगों को टाइम मिला तो मार्केट चले गए। लेकिन लौटने का रास्ता किसी को भी याद नहीं रहा। जो लोग ट्रेन में थे उनका भी फोन नहीं लग रहा था। बड़ी ही मुश्किल से लोगों से पूछते हुए स्टेशन पहुंचे। उसी दिन कुछ समय बाद ट्रेन को रवाना होना था इएलिए चिंता अधिक हो रही थी।
300 से अधिक दृश्य पटल
एक्सप्रेस में 300 से अधिक दृश्य पटल, 150 से अधिक वीडियो क्लिप्स प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इसमें मौजूद मॉडल्स ने बच्चों व बड़ो को अपनी ओर आकर्षित किया। एक्सप्रेस के12 डिब्बों में ऑडियो- विजुअल सामग्री, कम्प्यूटर तथा स्वयं एक्सपेरीमेंट करने योग्य उपकरण व प्रणाली मौजूद हैं। 13वें डिब्बे में बीएएसएफ केमिकल कंपनी द्वारा तैयार की गई किड्स लैब है। विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने इसमें पांच- पांच के ग्रुप में प्रेक्टिकल भी किए।
बाहर रखना पड़ा सामान
साइंस एक्सप्रेस के अंदर जाने से पहले सभी को अपना सामान बाहर रखना पड़ा। सभी की चैकिंग भी की गई। स्काउट्स- गाइड्स के कैडेट्स ने व्यवस्था में सहयोग प्रदान किया।
इन्होंने कहा
जानकारी का भण्डार कार्मल कांवेंट की छात्रा दिव्या यादव कहती हैं कि विभिन्न विषयों से जुड़ी जानकारी से सुसज्जित साइंस एक्सप्रेस पहली बार देखी है। एक साथ इतने माडल्स भी कभी देखने को नहीं मिले।
अच्छा लगा स्पेस शटल का मॉडल
एमपी कोएड स्कूल की टीचर ज्योति गुप्ता कहती है मैंने यहां स्पेस शटल का मॉडल देखा। उसके पार्ट्स देखना बहुत अच्छा लगा। मुझे इन साइंस के विभिन्न उपकरणों को देखने की बहुत ज्यादा उत्सुकता था।
जाना, डिस्कवरी क्या है
संस्कार पब्लिक स्कूल की दिव्या खिलवानी बताती हैं कि साइंस के इतने सारे माडल्स एक साथ देखे। एक साथ बहुत सी नई जानकारियां प्राप्त हुईं। डिस्कवरी क्या है, इसके बारे में जाना।
लाइफ का बेहतर पल
टीएम कांवेंट स्कूल के मुर्तजा अली बताते हैं कि यह लाइफ का सबसे बेहतर पल है। किड्स लैब में प्रैक्टिल करने को मिला। मेरी फिजिक्स में खासी रुचि है।
सबकुछ बहुत अच्छा
पांचवी के पल्लव प्रेमचंदानी शर्माते हुए बताते है कि इस तरह की ट्रेन उन्होंने पहली बार देखी है। यहां सबकुछ अच्छा है। उन्हें कम्प्यूटर और कार बहुत अच्छी लगी हालांकि उन्हें इसे चलाने का अवसर नहीं मिला।