इंदौर. जेल में कैदियों के आपसी झगड़े-फसाद की खबरें तो आम हैं किंतु सेंट्रल जेल इंदौर में हत्या के मामलों में उम्र कैद काट रहे जोबट (झाबुआ) के दो कैदी समधी बन गए। उन्होंने जेल में ही अपने बच्चों का रिश्ता तय किया और पेरोल पर बाहर आकर शादी कर दी। दोनों अब फिर जेल में हैं।
मगन पिता खूनसिंह भिलाला (48) निवासी जोबट जिला झाबुआ ने पेड़ काटने के विवाद में अपने ही गांव के इंदरसिंह को मौत के घाट उतार दिया था। इस कारण 1998 में उसे उम्र कैद हो गई। वहीं इडा पिता नानका भिलाला (45) नि. ग्राम पहाड़वा जोबट जिला झाबुआ ने अपने ही गांव के अमरसिंह की इसलिए हत्या कर दी थी क्योंकि उसने उसके परिवार की लड़की से छेड़छाड़ की थी। इस कारण 2002 में उसे भी उम्र कैद हो गई।
दोनों एक ही तहसील के हैं किंतु अलग-अलग गांव के होने से एक-दूसरे को जानते नहीं थे। साथ सजा काटने के दौरान उनमें पहचान हुई जो दोस्ती में बदल गई। एक दिन मगन ने कहा उसकी बेटी रेलम जवान होती जा रही है इसलिए उसकी शादी की चिंता बढ़ती जा रही है। तभी इडा ने कहा उसका बेटा बालू भी शादी लायक हो चला है। कुछ दिनों के विचार के बाद दोनों ने जेल में ही अपने बच्चों का रिश्ता कर दिया और समधी बन गए।
इसके बाद मगन व इडा ने सालाना मिलने वाली पेरोल की छुट्टी की अर्जी दी। जेल मुख्यालय भोपाल से मंजूरी मिलने पर मगन को 9 अप्रैल को 10 दिन के लिए और इडा को 11 अप्रैल को 21 दिन के पेरोल पर रिहा किया गया। दोनों अपने-अपने गांव गए और परिजन को रिश्ते के बारे में जानकारी दी। इसके बाद मुहूर्त निकलवाया और फिर शादी की तैयारी की।
हाल ही में जोबट में रेलम और बालू सात फेरों के बंधन बंध गए। बेटी की विदाई के वक्त मगन की आंखों से आंसू बह रहे थे तो इडा की आंखों में चमक थी कि बेटे की शादी हो गई और घर में बहू आ गई। दो दिन पहले ही दोनों बच्चों की शादी करके जेल लौट आए। वे लौटे तब जेल अधीक्षक संजय पांडे ने पूछा कि छुट्टियों का क्या उपयोग किया तो बोले अब हम समधी हैं, बच्चों की शादी करके आए हैं।