इंदौर. दो दर्जन महिलाएं झांसी की रानी का रूप धरकर तलवारे थामे घोड़ों पर सवार थीं। कोई तात्या टोपे और राणा बख्तावर का रूप धरकर आया था तो कोई आजादी की लड़ाई के लिए धन जुटाने वाले सेठ टमोलचंद का। बंदूक थामे मंगल पांडे तो फायर भी कर रहे थे। इनके पीछे था देशभक्ति के नारे लगाते सैकड़ों लोगों का हुजूम। ये जिस ओर से भी गुजरे माहौल में देशभक्ति का जज्बा भर दिया।
यह दृश्य था प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के 150वें वर्ष पर सोमवार को भाजपा द्वारा निकाली गई मशाल क्रांति यात्रा का। राजबाड़ा से शुरू हुई यात्रा में विभिन्न समाज और संगठनों के लोग शहीदों के नाम वाली टोलियों के रूप में शामिल हुए। बलिदानियों की वेशभूषा में शामिल हुए लोगों ने टोलियों के नामों को सार्थक कर दिया। निगम और आईडीए की झांकियों ने शहीदों की याद दिलाई।
टांट्या भील और हेमू कालानी वाहिनी के सदस्य मांदल की थाप-थिरकते हुए चल रहे थे। बुजुर्ग महिलाएं और बच्चे बग्घियों पर सवार थे। वंदेमातरम्, भारत माता की जय के नारे लगाते हुए लोग शाम सवा सात बजे रानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा पहुंचे। रास्ते में जगह-जगह स्वागत मंच लगाकर लोगों ने यात्रा पर पुष्पवर्षा की। प्रतिमा स्थल पर प्रांत सह संघ चालक कृष्णकुमार अष्ठाना, सत्यनारायण सत्तन, प्रदेश मंत्री बाबूसिंह रघुवंशी, महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा, आईडीए अध्यक्ष मधु वर्मा, नगर अध्यक्ष सुदर्शन गुप्ता, रमेश मेंदोला ने महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
तत्पश्चात डेढ़ सौ मोमबत्तियां जलाकर आजादी को अक्षुण्ण रखने का संकल्प लिया गया। नगर महामंत्री उमेश शर्मा ने 10 मई को डेढ़ सौ वें वर्ष की समाप्ति पर घर-घर में दीपोत्सव मनाने का आह्वान किया। विधायक महेंद्र हार्डिया, चंदू माखिजा, सूरज कैरो, मुकेशसिंह राजावत, आलोक दुबे, संयोजक कैलाश यादव, संजय शर्मा, पद्मा भोजे, मिनी बजाज, स्नेहलता उपाध्याय भी मौजूद थीं।
संगोष्ठी हुई
इंदौर अभिभाषक संघ द्वारा 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की 150वीं वर्षगांठ पर संगोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार कृष्णकुमार अष्ठाना थे। अध्यक्षता सुजानमल जैन ने की। श्री अष्ठाना ने संग्राम से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। अध्यक्ष किशोर गुप्ता, सचिव संजय शर्मा, रवींद्रसिंह गौड़, रामेश्वर त्रिवेदी मौजूद थे।
टूट गई मशाल
तय कार्यक्रम के अनुसार यात्रा राजबाड़ा पर मशाल प्रज्ज्वलन के बाद शुरू होने वाली थी। कार्यकर्ता मशाल लेकर कार्यालय से निकले ही थे कि इस्लामिया करीमिया स्कूल के पास तार से टकराकर वह नीचे गिर गई। इससे नोजल टूट गया। ताबड़तोड़ उसे रानीपुरा ले जाया गया। मरम्मत के बाद जवाहर मार्ग पर उसे यात्रा में शामिल किया जा सका।