जयपुर. भीषण गर्मी में परकोटे व अन्य इलाकों में अवैध बूस्टरों का इस्तेमाल आग में घी डालने का काम कर रहा है। गली के एक छोर पर रहने वाला 200 लीटर तक पानी खींच लेता है तो अंतिम छोर पर रहने वाले को 50 लीटर पानी भी नसीब नहीं हो रहा। इससे पड़ोसियों में आए दिन नोंक-झोंक व झगड़े होने लगे हैं, जबकि जलदाय विभाग का अवैध बूस्टर जब्त करने का अभियान गति नहीं पकड़ पाया है।
लोग जलदाय विभाग को अवैध बूस्टर लगाने वालों के बारे में सूचना भी दे रहे हैं, लेकिन एक दिन में दो टीमें फील्ड में होने की वजह से ठोस काम नहीं हो पा रहा। पिछले दो सप्ताह के दौरान 75 अवैध बूस्टर व 90 अवैध कनेक्शन काटने के साथ ही 21 उपभोक्ताओ को नोटिस दिए गए।
पड़ोसी हमारा पानी भी खींच लेते हैं : हसनपुरा निवासी रामनिवास वर्मा का कहना है कि उनका घर गली के अंतिम छोर पर है। अधिकतर लोग सप्लाई के समय बूस्टर चलाकर पानी खींच लेते हैं और हम 50 लीटर पानी भी नहीं भर पाते। आए दिन लड़ाई होती है। टैंकर मंगवाकर काम चलाते हैं।
रोज झगड़ा होता है : रामगंज बाजार निवासी अब्दुल रशीद ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ ही पेयजल किल्लत बढ़ गई है। पौन घंटा भी सप्लाई नहीं होती। उसमें भी बर्तनों की लंबी कतार लग जाती है। पानी भरने के लिए रोजाना मोहल्ले में कहासुनी होने लगी है। भट्टा बस्ती के इमरान ने बताया कि बूस्टर चलाने पर झगड़े होना आम बात हो गई है।
पांच कर्मचारियों की टीम, पकड़ पाती है दो बूस्टर : अवैध बूस्टर अभियान में जलदाय विभाग की ओर से एक जेईएन, एक फिटर व तीन हेल्परों की टीम बनाई गई है। हर रोज दो टीमें- एक सुबह व एक शाम को फील्ड में जाती हैं। इसके बावजूद रोजाना औसतन एक टीम दो बूस्टर ही पकड़ पाई है।
यहां है बूस्टरों की अधिकता : हसनपुरा, शांतिनगर, शास्त्रीनगर, मुरलीपुरा, ब्रrापुरी, चारदरवाजा, लक्ष्मीनारायणपुरी, रामगंज, सुभाष चौक, जौहरी बाजार, किशनपोल बाजार, मोतीडूंगरी रोड, जवाहरनगर, आदर्शनगर, झालाना, ट्रंसपोर्टनगर, ईदगाह, नाहरी का नाका, झोटवाड़ा आदि इलाके।
उधर जलदाय विभाग के एक्सईएन (उत्तर) एससी उपाध्याय का कहना है कि अवैध बूस्टरों के खिलाफ अभियान सफल रहा है। अब इसकी गति बढ़ाई गई है। इसके अलावा विभाग के एक्सईएन (दक्षिण) पीयूष गुप्ता ने बताया कि अब बूस्टर चलाने वालों पर शिकंजा कसा जा रहा है।
बूस्टर न चले तो प्यासे रह जाएंगे
ब्रrापुरी के नवीनकुमार मिश्रा ने बताया कि पानी बहुत कम प्रेशर से आ रहा है। घर के आंगन में गड्ढा खोदने पर भी काम नहीं बना। मजबूरन बूस्टर चलाकर पानी भरते हैं। पूरा बिल देते हैं, तो पूरा पानी लेना भी हमारा हक है।