जयपुर. राज्य के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एनेस्थीसिया व रेडियोलॉजी में एक वर्षीय सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे और हर कॉलेज में उपकरण के रख-रखाव के लिए बायोमेडिकल सेल की स्थापना की जाएगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री नरपतसिंह राजवी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में यह निर्णय किया गया।
बैठक में राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति व मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्र्यो व प्रमुख शासन सचिव ने भाग लिया। दोनों पाठ्यक्रम जयपुर, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर व कोटा मेडिकल कॉलेजों में शुरू किए जाएंगे। इनमें बीस-बीस सीटें निर्धारित होंगी, जिसमें दस-दस सीटें सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टरों के लिए निर्धारित होंगी।
बैठक में अस्पतालों में सफाई व्यवस्था का मशीनीकरण करने का भी निर्णय किया गया। बैठक में मेडिकल कॉलेज स्तर पर लगने वाले सर्जिकल शिविरों को सफल बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही मेडिकल यूनिवर्सिटी के रिसर्च हॉस्पिटल के निर्माण को प्राथमिकता से पूरा करने और मेडिकल कॉलेजों के विकास कार्र्यो का समयबद्ध कार्यक्रम बनाने के निर्देश दिए गए।
छोटे अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ेंगी
एनेस्थीसिया व रेडियोलॉजी में पाठ्यक्रम शुरू होने का राज्य की चिकित्सा सेवाओं पर अनुकूल असर पड़ेगा। इससे जिला, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्सरे व सोनोग्राफी जैसी सुविधाओं का आसानी से विस्तार हो सकेगा। साथ ही एनेस्थीसिया सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले डॉक्टर जिला अस्पताल, सैटेलाइट अस्पताल, सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आसानी से ऑपरेशन कर सकेंगे।
जीवनरक्षक उपकरणों का रखरखाव संभव
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग सेल बनने से जीवनरक्षक उपकरणों का रख-रखाव हो सकेगा।