अजमेर. शहर में अस्थमा के मरीजों की संख्या में हर साल तेजीसे बढ़ोतरी हो रही है। एक अनुमान के अनुसार शहर की आबादी की 12 से 15 फीसदी अस्थमा की मरीज है। इस लिहाज से छह लाख की आबादी में कोई 90 हजार नए पुराने अस्थमा के मरीज हैं।
शहर में अस्थमा बढ़ने के कई कारण हैं जिनमें कटोरेनुमा इसकी बनावट के साथ वायु प्रदूषण के अलावा गाजर घास और धूम्रपान की भी बड़ी भूमिका है। यों अलग अलग कारणों से एलर्जी, जंक फूड वाली लाइफ स्टाइल भी इसको बढ़ाने वाले कारणों में से एक है।
डॉ नीरज गुप्ता के अनुसार पार्थेनियम घास जिसे लोकल टर्म में गाजर घास और कहीं मजाक में कांग्रेस घास भी कहा जाता है, अस्थमा का बड़ा ट्रिगरिंग फैक्टर है। इसकी निकटता ही अस्थमा को बढ़ाने में काफी है। मजे की बात यह है कि यह पूरे अजमेर में बहुतायत से है। और तो और जेएलएन अस्पताल, टीबी और चेस्ट हॉस्पिटल की कच्ची जमीन भी इससे अछूती नहीं है।
शहर में सारे नाले-नालियों, इमारतों के इर्द गिर्द की कच्ची जमीन और खुले मैदानों पर तो इसकी भरमार है। सभी बड़े स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय इसे पानी देकर बड़े जतन से पाल रह हैं। बुके बेचने वाले इसकी कटी फटी पत्तियों को फूलों के नीचे बेस के रूप में मोरपंखी की जगह काम में ले इसे घर घर पहुंचा रहे हैं।
अमेरिका से आयातित है यह
पार्थेनियम घास का आयात अमेरिका से हुआ है। साठ के दशक तक अमेरिका से पीएल 480 योजना के तहत बरसों आए गेहूं के साथ इसके बीज भी कचरे के रूप में आते रहे। देश भर में गेहूं तो काम में लिया जाता रहा और पार्थेनियम का बीज नष्ट करने की बजाय यहां वहां फेंका जाता रहा जो आज जंगली घास के रूप में शहर में भरपूर मात्रा में मौजूद है। इसे जहां भी देखा जाए तुरंत उखाड़ कर जला दिया जाना चाहिए।