जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने श्याम नगर में अतिक्रमण हटाने के खिलाफ दायर राजीव गांधी कॉलोनी हितकारी समिति की याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने नगर विकास न्यास की कार्रवाई पर स्थगन के लिए पेश प्रार्थना पत्र को खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण गंभीर सामाजिक समस्या है, जिसका समाधान जरूरी है। यदि इस तरह के मामलों में अतिक्रमण करने वालों से सहानुभूति रखी गई तो इस समस्या को प्रोत्साहन मिलेगा।
न्यायाधीश डा. विनित कोठारी ने अपने आदेश में कहा कि नगर विकास न्यास ने सार्वजनिक सूचना प्रकाशित करवाते हुए अतिक्रमियों को 72 घंटों में स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने की मोहलत दी है। इसके बाद ही बलपूर्वक अतिक्रमण हटाने की बात कही गई है। ऐसे में न्यास की इस कार्रवाई में हस्तक्षेप करना न्यायोचित नहीं है। पूर्व में इसी अदालत ने श्याम नगर की सड़कों और पार्र्को से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था।
ऐसे में इस याचिका में कोई भी अंतरिम आदेश दिया जाना विरोधाभासी होगा। इससे पहले याची के अधिवक्ता एनएस आचार्य ने कहा कि श्याम नगर नाम से कोई याचिका अधिसूचित नहीं है। इसलिए न्यास को राजीव गांधी कॉलोनी के बाशिंदों को बेदखल करने से रोका जाए। आचार्य ने खंडपीठ के कई अन्य फैसलों का भी हवाला दिया।
न्यास के अधिवक्ता एसजी ओझा ने स्थगन प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए कहा कि श्याम नगर से अतिक्रण हटाने की कार्रवाई दुर्गाविहार विकास समिति की ओर से दायर याचिका में दिए गए हाईकोर्ट के आदेशों की पालना में ही की जा रही है।
इस याचिका में हाईकोर्ट ने श्याम नगर के पार्र्को और सड़कों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। ओझा ने कहा कि सड़कों से अतिक्रमण नहीं हटने के कारण न्यास इस नगर के आबंटियों को भूखंडों का भौतिक कब्जा नहीं दे पा रहा है।
भूखंडों का भौतिक कब्जा नहीं दे पाने के मामलों में जिला उपभोक्ता संरक्षण मंच में अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई भी चल रही है। न्यास अदालतों के आदेशों की पालना में ही विधिक तरीके से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहा है, इसलिए यह प्रार्थना पत्र खारिज किया जाए।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि श्याम नगर में अतिक्रमण करने वालों के पास भूमि के स्वामित्व संबंधी कोई दस्तावेज नहीं है और वे सालों से यहां जमे हुए हैं। ऐसे में सार्वजनिक भूमि पर इस तरह के अतिक्रमण में जनहित नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने स्थगन प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।