कोटा. वैम्बे योजना में मकान लेने के लिए सोमवार सुबह फार्म लेने नगर विकास न्यास (यूआईटी) पहुंची एक महिला से रिश्वत वसूलते क्लर्क विमलचंद जैन को लोगों ने रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद न्यास में खासा हंगामा मच गया। न्यास सचिव ने आरोपी क्लर्क को निलंबित कर दिया है। मामले में विभागीय जांच भी शुरू हो गई है।
घोड़ेवाला कच्ची बस्ती में पीड़ित महिला रुखसाना बानो का घर करीब सात साल पहले सांप्रदायिक तनाव के दौरान उजड़ गया था। लंबे अरसे तक आश्वासन पाने के बाद हाल में प्रशासन ने वैम्बे योजना में उसे मकान दिए जाने का भरोसा दिया हुआ था। वह फार्म लेने के लिए पिछले दो महीने में यूआइटी के कई चक्कर काट चुकी थी। पुनर्वास योजना विभाग में कार्यरत इस क्लर्क ने उसे सोमवार को फिर बुलवाया था।
रुखसाना ने बताया कि जब वह पहुंची तो क्लर्क ने उसे टरका दिया और कहा, पैसे लाओ और फार्म ले जाओ। लगातार परेशान किए जाने की जानकारी वह परिचितों और कांग्रेस से जुड़े जफर मोहम्मद को दे चुकी थी। लिहाजा वे भी दल-बल के साथ यूआईटी पहुंच गए।
उन्होंने रुखसाना को पांच-पांच सौ के दो नोट लेकर भेजा और उनके नंबर नोट कर लिए। क्लर्क ने जैसे ही रकम ली, लोगों ने उसे घेर लिया। करीब आधे घंटे तक यूआईटी में खासा हंगामा हुआ। लोग लिपिक को यूआईटी सचिव सोहनलाल शर्मा के पास ले गए। उन्होंने उसे तत्काल मुअत्तल कर दिया।
यूआईटी ने मांगे थे सबूत : कांग्रेस के जफर मोहम्मद ने बताया कि पूर्व में भी फार्म के बदले रुपए लेने की शिकायत यूआईटी सचिव को की गई थी लेकिन, उन्होंने सबूत लाने के लिए कहा था। इसके बाद ही लोगों ने यह कार्रवाई की।
लिपिक ने कहा- महिला ने दिए रुपए : बाबू विमलचंद जैन ने कहा, मैंने तो फार्म दे दिया था। बाद में रुखसाना ने एक हजार रुपए दिए और लोगों को बुला लिया। मैंने उससे रुपए नहीं मांगे थे।
जल्द मिलेंगे मकान
यूआईटी सचिव ने आवेदकों को आश्वस्त किया है कि वैम्बे में चयनित लोगों को जल्द से जल्द मकान आवंटन की भी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
क्या है मामला?
रुखसाना समेत करीब 25 लोग ऐसे हैं जिनकी झोपड़ियां 27 अगस्त 2000 को घोड़ेवाला कच्ची बस्ती में हुए दंगे में नष्ट हो गई थीं। प्रशासन ने उन्हें पुनर्वास का भरोसा दिया मगर मकान फिर भी नहीं मिले। कुछ माह पूर्व वैम्बे योजना में मकान देने की बात हुई तो वे आवेदन फार्म लेने यूआईटी पहुंचे। जहां कनिष्ठ लिपिक जैन पिछले दो माह से उन्हें टरका रहा था।
नशे में था : कनिष्ठ लिपिक ने शराब पी रखी थी। यूआईटी सचिव ने तहसीलदार भवानी सिंह को तत्काल लिपिक का मेडिकल कराने के लिए कहा।