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Shekhawati Shekhawati झुंझुनूं. हर महीने पांच और 20 तारीख को होने वाली ग्राम पंचायतों की बैठकों को शायद ही कभी गंभीरता से लिया जाता है। इनका हश्र भी ठीक वैसा ही होता है, जो ग्रामसभाओं का होता रहा है। 30 रोज में महज दो रोज और वह भी दो-तीन घंटे भी गांव के पंच-सरपंच बैठकों के लिए नहीं निकाल पाते।
पंचायत की मीटिंगों में महज खानापूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं होता। सरपंच के करीबी पंच ही इन बैठकों में मौजूद रहें तो रहें। पंचायत की बैठकों में कोरम पूरा दिखाने के लिए बाद में रजिस्टर पंचों के घर भेजकर उनसे हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं। पांच मई को जब भास्कर रिपोर्टरों ने पंचायतों की इन बैठकों की गतिविधियों की पड़ताल की तो हकीकत आई सामने।
लटका रहा ताला
बुहाना. बड़बर ग्राम पंचायत में पांच मई सोमवार को बैठक होनी थी लेकिन पंचायत भवन को दिनभर ताला लगा रहा। दोपहर बाद सरपंच से बात करने पर बताया गया कि भवन की चाबी ग्रामसेवक के पास है, जबकि ग्रामसेवक दिनभर नहीं आया। इस वजह से बैठक नहीं हो पाई। समाजसेवी गिरवरसिंह ने बताया कि किसी काम के लिए वह तीसरी बार यहां पर आया पर हर बार पंचायत भवन को ताला लगा मिला।
11 में से 3 पंच आए
बुहाना. भिर्र पंचायत में बैठक तो हुई मगर उसमें 11 पंचों में से केवल तीन पंच उपस्थित हुए। ऐसे में सरपंच अनिता मान व ग्रामसेवक काशीराम ने केवल औपचारिकता पूरी की। पंच महावीर की मानें तो सरपंच व ग्रामसेवक ने उन्हें बैठक की सूचना तक नहीं दी। उन्होंने बताया कि सरपंच केवल बैठक में अपन पक्ष के लोगों को बुलाकर औपचारिकता पूरी कर लेते हैं।
बैठक का बहिष्कार
खिरोड़. खिरोड़ में पंचों ने पंचायत बैठक का बहिष्कार किया। सरपंच कमला निठारवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक शुरू हुई मगर पंचों ने भुगतान नहीं मिलने का मामला उठाते हुए उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर नहीं किए। जिससे बैठक में विकास कार्यो के प्रस्ताव नहीं लिए जा सके।
ग्रामसेवक का कहना था कि पंचों को पहले मासिक बैठकों का भुगतान एसएफसी-2 योजना में होता था। लेकिन अब यह योजना बंद हो गई है और मासिक बैठकों में पंचों के भुगतान पंचायत की निजी आय से करने आदेश हैं। पंच रामेश्वरलाल मीणा, लाडा देवी, सदीक खां, लालचंद, रजनी देवी, पुष्पा व सुशीला देवी सहित समस्त पंच व ग्रामीण मौजूद थे।