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विधेयक का विरोध : आरक्षण के अंदर आरक्षण मांगा

नई दिल्ली. करीब 12 सालों के लंबे इंतजार के बाद आज राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया लेकिन इसे लेकर काफी विरोध केंद्र की यूपीए सरकार को झेलना पड़ा है।

राज्यसभा के भीतर आज समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने विधेयक का भारी विरोध करते हुए जबरदस्त हंगामा किया। सपा सदस्यों ने विधेयक की कॉपियां फाड़ दीं। सपा सांसद अबू आजमी ने कहा कि उन्होंने काफी कोशिश की कि वे कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज से विधेयक की कॉपी लेकर फाड़ दें।

सदन में विधेयक पेश करने के दौरान धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। इसके अलावा इस विधेयक में संशोधन की चौतरफा मांग सामने आ रही है।

केंद्र सरकार के सहयोगी और रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव काफी मान-मनौव्वल के बाद विधेयक पेश किए जाने के लिए राजी तो हो गए हैं लेकिन उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि इस विधेयक में स्पष्ट प्रावधान के तहत पिछड़ी जाति की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था की जाए।

दूसरी तरफ, भारतीय जनशक्ति की प्रमुख उमा भारती ने मांग की है कि एससी, एसटी और ओबीसी के तहत महिलाओं के आरक्षण को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया जाना चाहिए। इस बारे में बताया गया है कि उमा भारती ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से बातचीत भी की।

आरोप-प्रत्यारोप :
विधेयक पेश किए जाने के बाद केंद्र सरकार के सहयोगी दल राजद की ओर से बयान आया है कि विधेयक को चोर रास्ते से पेश किया गया। यह भी कहा जा रहा है कि सरकार ने यह विधेयक पेश कर सिर्फ औपचारिकता पूरी की है और इसका राजनीतिक लाभ लेने की मंशा रखी है। इससे पहले जदयू के नेता शरद यादव भी विधेयक का विरोध कर चुके हैं।

इन आरोपों का जवाब देते हुए महिला विकास मंत्री रेणुका चौधरी ने कहा कि आरोप लगते रहते हैं लेकिन जरूरी यह है कि शुरुआत की जाए। शुरुआत करने के बाद ही मुकाम पर पहुंचा जा सकता है। अंबिका सोनी ने भी इस विधेयक को पेश किए जाने का स्वागत किया और इसे महत्वपूर्ण कदम बताया।

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