जांजगीर (छग).
कहते हैं कुछ नया करने वाले ही इतिहास रचते हैं और इतिहास रचने के लिए रास्ता संघर्षों से होकर ही गुजरता है। ऐसा ही कुछ ‘नया’ और अपने संघर्षों को परिणाम तक पहुंचाया है, छत्तीसगढ़ के रामकीर्तन राठौर ने। 12 साल पहले तक बेरोजगार घूमने वाले रिक्शा चालक रामकीर्तन ने ‘कमाई, बचत और ब्याज’ में ऐसा सामंजस्य बैठाया कि आज वह करोड़पति बन गया। अब वो ईमानदारी, लगन और कड़ी मेहनत की मिसाल बन गया है।
जांजगीर जिले के सारागांव निवासी रामकीर्तन राठौर (37) ने बरसों तक बेरोजगारी से जूझने के बाद 1995-96 में एक स्थानीय स्कूल में रिक्शा चलाना शुरू किया। इसके एवज में उन्हें जो राशि मिलती, उसके आधे हिस्से को वे ब्याज पर दे देते थे। यह राशि धीरे-धीरे बढ़ती गई और उन्होंने इसे प्रमुख व्यवसाय के रूप में अपना लिया। आज उनका यह व्यवसाय काफी फैल गया है और उन्होंने इस कारोबार के लिए बकायदा लाइसेंस भी बनवा लिया है। 12वीं पास रामकीर्तन ने आईटीआई से फिटर की ट्रेनिंग भी ली थी।
दीन-दुखियों की सेवा: रामकीर्तन दीन-दुखियों तथा सामाजिक व धर्मार्थ कार्यो के लिए लाखों रुपए का चंदा देते हैं। इसके आलावा सारागांव के विभिन्न स्कूलों में वे पिछले दो-तीन वर्षो से प्रतिभावान छात्रों को लाखों रुपए पुरस्कार स्वरूप बांट चुके हैं।
लगन, मेहनत और ईमानदारी : 500 रुपए से आज एक करोड़ रुपए तक पहुंचने की अपनी सफलता के बारे में रामकीर्तन ने कहा कि सच्ची लगन व ईमानदारी के साथ कोई भी कार्य असंभव नहीं है। काफी धन कमा लेने के बावजूद वे आज भी मोबाइल या मोटरसाइकिल जैसी भौतिक सुविधाओं से परहेज करते हैं। सादगी ऐसी कि शहर में आने-जाने के लिए साइकिल ही उनका प्रिय वाहन है।
सफलता के सूत्र :
शुरूआत : दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष
फिर : स्कूल में रिक्शा चालक की नौकरी
आमदनी : पांच सौ रुपए मासिक
अब : एक करोड़ का व्यवसाय
समय : 12 साल
जरिया : बचत, नई सोच, उसे कर गुजरने का जज्बा