लंदन. क्रिकेट में इस समय बदलाव की बयार बह रही है। ऐसे में भला बल्ला क्यों अछूता रहे। सब कुछ ठीक रहा तो भविष्य में खिलाड़ी धातुमिश्रित बल्ले के साथ मैदान पर नजर आ सकते हैं। एमसीसी (मेलबोर्न क्रिकेट क्लब) इस बदलाव पर गंभीरता से विचार कर रही है।
एमसीसी लॉ कमेटी प्रमुख जॉन स्टीफेंसन ने एक टैबलॉयड को दिए साक्षात्कार में कहा कि क्लब बल्ले और गेंद के संतुलन को लेकर गंभीर है। लेकिन वर्तमान में बल्ले की परिभाषा में परिवर्तन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लॉ कमेटी इस संबंध में बुधवार को प्रस्ताव रखेगी, जिसमें धातुमिश्रित बल्ले को मान्यता देना शामिल है। अभी तक बैट में ग्रेफाइट या टाइटेनियम मिलाने की मनाही थी। लेकिन बल्ले की मजबूती के लिए इसे स्वीकार किया जा सकता है। जॉन के अनुसार शुरू में बैट के हैंडिल में ही ऐसा करने की छूट दी जाएगी। यानि यदि संशोधन स्वीकार किया जाता है तो हैंडिल में लकड़ी, गोंद और रबर के अतिरिक्त ग्रेफाइट और टाइटेनियम भी मिला होगा। इससे बल्ले की मजबूती और उम्र बढ़ जाएगी।
शक्ति में नही होता इजाफा : स्टीफेंसन ने बताया कि अभी तक हुए शोध से ऐसा प्रमाणित नहीं हुआ है कि ग्रेफाइट या टाइटेनियम के उपयोग से बल्ले की ताकत में इजाफा होता हो। हां, इनके उपयोग से बल्ले का वजन कम होगा, जो बल्लेबाज को शॉट खेलने की ज्यादा आजादी देगा। हालांकि कई वैज्ञानिक इसके प्रभाव का अध्यन भी कर रहे हैं। हालांकि शौकिया क्रिकेटरों के लिए यह इसी साल सितंबर तक बाजार में उपलब्ध हो सकती है।
आईसीसी से जल्दी मान्यता मिलना मुश्किल : शौकिया क्रिकेटरों के लिए भले ही इसे जल्द मान्यता मिलने की उम्मीद है लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (टेस्ट, वनडे या टी-20) में ऐसा जल्दी नहीं होने वाला है। स्टीफेंसन ने कहा कि तकनीक का प्रयोग अच्छा है लेकिन इसके ज्यादा होने पर भविष्य में गेंद और बैट के संतुलन पर असर पड़ सकता है। जाहिर है आईसीसी ऐसे किसी बदलाव को आसानी से स्वीकार नहीं करेगी। यानि सब कुछ ठीक रहने पर ही ये बल्ले अंतरराष्टीय स्तर पर स्वीकार किए जाएंगे।
पोंटिंग ने पहले भी किया उपयोग : विश्व एकादश के साथ 2005 में हुए सुपर सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के कप्तान रिकी पोंटिंग ने ग्रेफाइटयुक्त बल्ले का इस्तेमाल किया था। कूकाबूरा के इस बल्ले में ग्रेफाइट की एक परत चढ़ी हुई थी। वह इस बल्ले का लगातार इस्तेमाल नहीं कर सके क्योंकि आईसीसी ने जांच के बाद इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी।