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मां के लार परीक्षण से बच्चों को एड्स से बचाने में मदद

मांट्रियल. महाराष्ट्र के वर्धा जिले में किए गए मैदानी परीक्षण में एचआईवी के एक नए प्रकार के टेस्ट को बीमारी की रोकथाम में कारगर पाया गया है।

कनाडा के मांट्रियल स्थित मैकगिल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने नौ माह में कुल 1,222 गर्भवती माताओं की लार का परीक्षण किया, जिसमें 20 मिनट में परिणाम मिल जाता है। मां के एचआईवी ग्रस्त पाए जाने पर बच्चे को एंटी- र्रिटोवायरल दवा देकर एड्स से बचा लिया गया। परीक्षण में 11 महिलाएं एचआईवी वायरस से संक्रमित पाई गई थीं, जिनका पहले कभी परीक्षण नहीं किया गया था। जन्म लेने वाले 11 बच्चों में से 10 न सिर्फ जीवित रहे बल्कि वे एचआईवी वायरस से संक्रमित भी नहीं थे। 82 फीसदी महिलाओं का कभी एचआईवी परीक्षण नहीं हुआ था। ओरा क्विक टेस्ट नामक इस परीक्षण को अमेरिका ने 2004 में मान्यता दी थी।

* ‘रक्त की जांच के बजाय मां से बच्चे में एड्स के फैलाव को रोकने में लार परीक्षण बेहतर उपाय है। भारत में इसे मानक प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।’
- निकिता पंत पई, संक्रामक रोग विभाग, मेकगिल यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर





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