नई दिल्लीकेंद्र ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को उच्च शिक्षण संस्थानों में 27 फीसदी आरक्षण संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पहली बार कानूनी व्याख्या करते हुए कहा है कि संविधान पीठ के फैसले में ग्रेजुएट हो चुके पात्र छात्रों को आरक्षण देने पर रोक नहीं लगाई गई है। दिल्ली हाईकोर्ट में मंगलवार को जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने हाजिर हुए अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि संविधान पीठ ने उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण देने के लिए सरकार को हरी झंडी दे दी है।
सुब्रमण्यम ने पैन-आईआईएम एलुमनी एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका का विरोध करते हुए कहा, इस मामले पर फैसला हो चुका है। आरक्षण विरोधियों की यह आपत्ति कि ग्रेजुएशन के बाद किसी उम्मीदवार को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता, गलत है।’ उन्होंने कहा कि फैसले के ऑपरेशनल पार्ट में आरक्षण को ग्रेजुएशन तक सीमित रखने का उल्लेख नहीं है।
पीआईएए ने पीजी पाठ्यक्रमों में आरक्षण को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए दलील दी है कि सरकार शीर्ष कोर्ट के उस फैसले की गलत व्याख्या कर रही है, जिसमें ओबीसी आरक्षण नीति को बरकरार रखते हुए कहा गया है कि इसे उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों में लागू नहीं किया जाएगा।
पीआईएए के वकील ने कहा, ‘जस्टिस दलवीर भंडारी ने साफ कहा है कि पीजी पाठ्यक्रमों में कोई आरक्षण नहीं होगा, जबकि जस्टिस अरिजित पसायत और सीके ठक्कर का मत था कि आरक्षण ग्रेजुएशन के साथ खत्म होना चाहिए।’