अजमेर. ब्लैकमेल कांड और स्मैक तस्करी जैसे संगीन मामलों अभियुक्त नफीस चिश्ती को संदिग्ध परिस्थितियों में दो दिन पहले जोधपुर जेल भेज दिया गया, अदालत के आदेश के बाद मंगलवार को उसे वापस अजमेर जेल लाया गया।
नफीस का आरोप है कि जेल के आला अफसरों की नाजायज मांग पूरी नहीं करने पर एनकाउंटर करने के लिए उसे रातोंरात दूसरी जेल ले जाया गया था। अदालत ने जोधपुर व अजमेर के जेल प्रशासन से जवाब तलब किया है। साथ ही रंगदारी वसूली के मुकदमे की सुनवाई के दौरान उसे अजमेर में ही रखने के आदेश दिए हैं। जेल प्रशासन के मुताबिक डीजी (जेल) के निर्देशानुसार नफीस को वहां लंबित मामले में जोधपुर जेल भेजा गया था।
अफसरों पर आरोप
नफीस चिश्ती की ओर से उसके वकील अजय वर्मा ने एसीजेएम कोर्ट में अर्जी दाखिल की। अर्जी में बताया गया है कि 3 मई की रात लगभग नौ बजे अचानक नफीस को बस से जोधपुर ले जाया गया, जबकि नियमों के मुताबिक शाम छह बजे बाद कैदियों को जेल से ना तो बाहर निकाला जा सकता है ना ही अंदर किया जा सकता है।
नफीस के वकील ने बताया कि अदालत की अनुमति के बिना नफीस को आनन-फानन में जोधपुर ले जाने का मकसद उसका एनकाउंटर करना था। नफीस की ओर से आरोप लगाया गया कि जेल के आला अफसरों ने उससे जेल में सुविधाएं और दूसरी जेल में नहीं भेजने के एवज में मोटी रकम मांगी थी।
इनकार करने पर उसे जोधपुर ले जाया गया, उसने शपथ पत्र पेश कर बताया कि जोधपुर में उसका कोई मुकदमा लंबित नहीं है। नफीस की ओर से यह भी कहा गया कि अजमेर में चल रहे मुकदमों में या जेल में आचरण को लेकर उसके खिलाफ किसी तरह की शिकायत नहीं है।
अदालत ने किया जवाब तलब
एसीजेएम पूनम दरगन ने अर्जी पर सुनवाई के बाद जेल प्रशासन से रिकॉर्ड तलब करते हुए जवाब मांगा है कि बिना इजाजत के नफीस को जोधपुर क्यों ले जाया गया। अब सुनवाई गुरुवार को होगी।
>> डीजी साहब ने नफीस को जोधपुर जेल भेजने के निर्देश फैक्स के जरिये दिए थे। जेल अधीक्षक प्रीता भार्गव ने मेडिकल लीव ली थी, लिहाजा दो दिन के लिए कार्यभार मुझे सौंपा गया। किन कारणों से जेल बदली गई, इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
चेतनदेव उपाध्याय, कार्यवाहक जेल अधीक्षक अजमेर