बीकानेर. वाणिज्यिक कर विभाग ने सूरतगढ़ ताप विद्युत परियोजना में 220 केवी की छठी इकाई के कार्य पर राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम से वर्क कांट्रेक्ट टैक्स के 13 करोड़ रुपए वसूल किए हैं। विभाग को निगम से इस वर्ष में करीब 30 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है।
सूरतगढ़ थर्मल प्लांट में इन दिनों 220 केवी की छठी इकाई का काम चल रहा है। करीब एक हजार करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में भारत हैवी इलेक्ट्रीकल्स लिमिटेड (भेल) को 351 करोड़ तथा इंडूर कंपनी को करीब 300 करोड़ रुपए का कांट्रेक्ट दिया हुआ है। सूत्रों के अनुसार भेल के पास सप्लाई और इरेक्शन टैस्टिंग कॉपरेरेशन (ईटीसी) का काम है। इसमें 80 प्रतिशत भाग सप्लाई का है।
दोनों कार्य एक ही कंपनी के पास होने के कारण बिक्री कर विभाग ने भेल को वर्क कांट्रेक्ट टैक्स जमा करवाने का नोटिस दिया था। इस मुद्दे पर उच्च स्तर पर विद्युत वितरण कंपनियों की समन्वय समिति में काफी मंथन किया गया। उसके बाद समिति ने राज्य सरकार को टैक्स जमा करवाने का निर्णय लिया। निगम के इस फैसले से विभाग को अप्रैल में 13 करोड़ रुपए मिल चुके हैं। इस माह पांच करोड़ रुपए और मिलेंगे।
इस प्रकार इस वर्ष कुल लागत का तीन प्रतिशत के हिसाब से 30 करोड़ रुपए का राजस्व विभाग को मिल सकेगा। हालांकि निगम के इस फैसले से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ी है। कंपनी से कांट्रेक्ट के हिसाब से इस राशि का भुगतान निगम को ही करना है। निगम यह सोच कर संतुष्ट है कि सरकार का पैसा सरकार के ही खजाने में जा रहा है।
>> विद्युत निगम से करोड़ों रुपए का राजस्व विभाग को मिला है। इसका असर अन्य इकाइयों पर भी पड़ा है। इस माह पांच करोड़ रुपए का मिलने की उम्मीद है।
फूलचंद वर्मा, उपायुक्त (प्रशासन), वाणिज्यिक कर विभाग
जनवरी में उजागर हुआ प्रकरण
सूरतगढ़ थर्मल पावर में 220 केवी की इकाई के कार्य के चलते वर्क कांट्रेक्ट टैक्स की वसूली पर वाणिज्यिक कर विभाग की नजर जनवरी में पड़ी। विभाग की रतनपुरा चैक पोस्ट पर एसीटीओ पी.एन.शर्मा ने भेल की सप्लाई लेकर आए एक ट्रक को रोका था।
माल के दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद कंपोजिट कांट्रेक्ट का मामला पकड़ में आने पर विभाग ने माल पर लाखों की पेनल्टी वसूल की। शर्मा ने इस प्रकरण की सूचना उच्चधिकारियों को दी तो टैक्स के रूप में करोड़ों रुपए आते देख विभाग भी सक्रिय हो गया।
>> विद्युत वितरण कंपनियों की समन्वय समिति की बैठक में टैक्स देने का निर्णय लिया जा चुका है। सरकार का पैसा है सरकार के पास ही जा रहा है। हालांकि यह सही है कि इससे कार्य की लागत बढ़ी है।
पी.एन.सिंगल, चीफ इंजीनियर, सूरतगढ़ थर्मल प्लांट