जोधपुर.
शास्त्रीनगर में रहने वाली हाउस वाइफ श्रेया सिंह मंगलवार सुबह घर से सब्जी लेने निकलीं तो उनके पास सब्जी की लिस्ट में भिंडी, ग्वारफली तथा तोरी के नाम प्रमुख रूप से लिखे हुए थे। लेकिन जब उन्होंने मंडी में इन सब्जियों के भाव पूछे तो उनका इरादा बदल गया तथा इन सब्जियों के बदले में आम, अंगूर व पपीता लेकर आ गई।
दरअसल इन दिनों यह मानसिकता सिर्फ श्रेया सिंह जैसी हाउस वाइफ की ही नहीं है बल्कि सब्जी मंडी में फ्रूट से ज्यादा भावों पर बिकने वाली उन सब्जियों को लेकर है जिनके भाव पिछली गर्मियों में एक तिहाई से भी कम थे।
एक ओर गुजरात व महाराष्ट्र में बेमौसम आए तूफान व बरसात के बावजूद आम के भावों में इतनी तेजी नहीं आई जितनी जोधपुर के आस-पास के गांवों से बेरों से आ रही सब्जी के भावों में आई तेजी ने रसोई का बजट बिगाड़ कर रख दिया है।
किसानों को फायदा नहीं
मंडी में आसमान छूते सब्जियों के भाव देख कर लगता होगा कि किसानों की पांचों अंगुलियां घी में हैं, जबकि हालात इससे उलट हैं। मथानिया संवाददाता के अनुसार खेतों व बेरों से सब्जियां सस्ते में बिकती हैं जबकि दलाल व ठेकेदार मंडी में मनमर्जी के भावों पर बेचते हैं।
मथानिया सहित आस पास के गांवों से सब्जियों के प्रति 20 किलो के पैकेट जोधपुर पहुंचाने का खर्च 10 रुपए प्रति पड़ता है। अथवा थोक सब्जी लाने पर 50 रुपए प्रति क्विंटल का भाड़ा देना पड़ता है।
जोधपुर फ्रूट व सब्जी मंडी में फ्रूट के भाव
सेव 40 -50 रुपए किलो
आम 30-50 रुपए किलो
केला 15-20 रुपए किलो
ऑरेंज 20-25 रुपए किलो
पपीता 15-20 रुपए किलो
अंगूर 30-40 रुपए किलो
खरबूजा 25-30 रुपए किलो