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Shekhawati Shekhawati सीकर. परशुरामपुरिया कॉलेज के 250 स्टूडेंट्स को आयुर्वेद विवि द्वारा एग्जाम में बैठाने से इनकार के संबंध में दैनिक भास्कर की मुहिम रंग लाई। छात्रों के आंदोलन को देखते हुए मंगलवार को विवि ने बीएएमएस प्रथम और अंतिम वर्ष के एग्जाम आगामी आदेश तक स्थगित कर दिए।
इससे पहले प्रशासन से मिली समय सीमा बीत जाने के बाद स्टूडेंट्स ने सुबह कलेक्ट्रेट के आगे जाम लगा दिया। चार घंटे तक लगे जाम के कारण कतारें लग गइर्ं। मौके पर पहुंचे एसडीएम महेंद्र शर्मा, शहर कोतवाल महम्मूद खान व डीएसपी ग्रामीण पृथ्वीराज मीणा ने स्टूडेंट्स को खूब समझाने की कोशिश की।
मगर स्टूडेंट्स अपनी जिद पर अड़े रहे। इसी बीच प्रशासन व स्टूडेंट्स के बीच कई बार विवाद हुआ और प्रशासन ने जाम खुलवाने के लिए कई बार सख्ती भी जताई, लेकिन स्टूडेंट्स प्रशासन के आगे नहीं झुके। बाद में एसडीएम महेंद्रकुमार शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान आयुर्वेद विवि के कुलपति प्रो. बनवारीलाल गौड़ से फोन पर लंबी बातचीत की।
इस पर कुलपति ने स्टूडेंटस की अटेंडेंस से संबंधित वेरिफिकेशन लैटर मांगा। जिसके लिए एसडीएम ने कालेज प्राचार्य डा. केएन गोयल को मौके पर बुलाया और खुले में लगी कक्षाओं के संबंध में वेरिफिकेशन लैटर लिखाकर विवि को फैक्स करा दिया।
इसके बाद ही स्टूडेंट्स ने जाम हटाया। इसी बीच मंगलवार को अनशन के दौरान परशुरामपुरिया कॉलेज के छात्र विक्रमसिंह रणवां की हालत बिगड़ गई। छात्र को जयपुर रैफर कर दिया गया। अनशन के दौरान रणवां सहित चार छात्रों की तबीयत बिगड़ गई।
घिरा रहा कलेक्ट्रेट : मंगलवार को कलेक्ट्रेट आंदोलनकारियों से घिरा रहा। करीब चार घंटे तक कोर्ट रोड पर आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया। पुलिस ने जयपुर-बीकानेर व शहर में जाने वाले वाहनों को दूसरे रास्तों से निकाला। पहले तो आयुर्वेद कालेज के विद्यार्थियों ने जाम लगा दिया।
बाद में ऑटो चालकों की डेढ घंटे की हड़ताल ने इलाके को थाम दिया। चिलचिलाती दोपहरी में लोगों को गंतव्य तक पैदल जाना पड़ा। इन सबके बीच पुलिस को भी संकट से जूझना पड़ा। दो पक्षों की ओर से मांगें मंगवाने के लिए किए जा रहे आंदोलन को कंट्रोल करने के लिए खाशी मशक्कत करनी पड़ी। इसके लिए अतिरिक्त जाब्ता बुलाना पड़ा।
अब क्या होगा
शिक्षकों के आंदोलन की जांच होगी।
हड़ताल में कक्षाएं कैसे लगी और कोर्स कैसे कराया गया इसकी जांच होगी।
जांच के बाद फैसला होगा।
छात्र निर्दोष, जांच हो: गवर्नर
विवि के पत्रों का प्राचार्य ने जवाब क्यों नहीं दिया, इसकी जांच की जाए।
कॉलेज प्रबंधन को स्टूडेंट्स के भविष्य से खेलने का अधिकार किसने दिया।
हड़ताल के कारण कॉलेज ने छात्रों की पढ़ाई कैसे पूरी कराई।
प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
कलेक्टर को जांच रिपोर्ट विवि को सौंपने के आदेश।
(जैसा कि राज्यपाल एसके सिंह ने कुलपति को बताया।)
छात्रहित देखेंगे : कुलपति
कॉलेज के खिलाफ कार्रवाई होगी।
क्या कॉलेज ने 22 महीने कक्षा लगाई।
प्राचार्य ने आज कैसे उपस्थिति का पत्र भेजा, जबकि हम पत्र लिखते रहे।
हड़ताल में कैसे हुई पढ़ाई।
कॉलेज ने एक एग्जाम पहले कैसे करा दी, वो भी एक ही टीचर ने।
(जैसा कि कुलपति प्रो. बनवारीलाल ने बताया।)
प्रिंसिपल कमेंट ऑन इश्यू
>> परीक्षा को लेकर विवि को कई बार पत्र लिखे हैं। मानवाधिकारी आयोग की टीम आई थी, उनसे भी मैंने 2004 बैच की प्रेक्टिकल को लेकर बातचीत की है। बुधवार को मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य आएंगे।
प्रो. केएल गोयल, प्राचार्य परशुरामपुरिया कॉलेज