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शुरू होते ही लड़खड़ाई नरेगा!

चूरू. yojna जिले में एक अप्रैल से शुरू हुई नरेगा योजना शुरुआती दौर में ही लड़खड़ाती नजर आने लगी है। योजना के लागू होने के एक महीने के भीतर जिलेभर से मजदूरों की शिकायतों के अंबार लगने शुरू हो गए हैं। कहीं मजदूरों का भुगतान अटका है, तो कहीं सुविधाओं को लेकर मजदूरों में आक्रोश व्याप्त है।

जानकारी के अनुसार जिलेभर में 825 कार्य स्थल पर करीब 86 हजार मजदूरों को लगाया गया है, पर अभी तक उन्हें मजदूरी नियमानुसार नहीं दी जा रही है। हालात यह है कि मजदूरी करने वाले मजदूरों को काम के उपकरण साथ लेकर आने को विवश होना पड़ रहा है, जबकि योजना के तहत उपकरण प्रशासन की ओर से उपलब्ध करवाए जाने थे।

नरेगा की प्रोग्रेस के बारे में पूछने पर श्रम कोर्ट के अधिवक्ता ने बताया कि अभी तक सहायकों की नियुक्तियां ही नहीं हुई है, ऐसे में उपकरण देगा कौन। गर्मी से बचाव के लिए वहां छाया व पानी की व्यवस्था भी नहीं है।

>> मजदूरों को उपकरण देने के आदेश लेट आए, जिसके अनुसार व्यवस्था की जा रही है। पहले पखवाड़े की भुगतान प्रक्रिया चालू है। मजदूरी का भुगतान नकद कर रहे हैं, आगे से खाते खुलवाकर भुगतान किया जाएगा।
भींवाराम चौधरी सीईओ, जिला परिषद, चूरू

कैसे मिलेगा पैसा
बीनासर की सुनीता को अभी मालूम ही नहीं है कि कार्य करने पर कैसे मजदूरी मिल पायेगी। अभी तक न तो अकाउंट खुलवाया गया है और ना ही 12 दिन से कोई पैसा मिला है। पैसा कब और कैसे मिलेगा, उन्हें नही मालूम।

काम पूरा, मजदूरी आधी
नरेगा के तहत काम में लगे मजदूरों की मजदूरी को लेकर शिकायतें बढ़ रही है। हमीरवास ग्राम पंचायत के गांव ढाणी जगमाल के मेघराजाणा जोहड़ में काम कर रहे मजदूर बेगराज, संदीप, सुभाष ने बताया कि उन्होंने टास्क के अनुसार काम किया, पर मजदूरी आधी दी गई।

महिला मजदूर सुविधाओं को तरसी
मजदूरी पर लगी महिलाओं को तयशुदा सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। बच्चों के लिए कार्य स्थल पर पालना लगाने के दावे किए गए थे, लेकिन अभी तक एक भी पालने की व्यवस्था नहीं है। फिलहाल तो पानी की व्यवस्था भी मजदूर स्वयं ही करते हैं।





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