जयपुर. पिछले साल की तरह इस बार भी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की किताबों के लिए विद्यार्थियों को परेशान होना पड़ रहा है, जबकि नया सत्र पिछले महीने शुरू हो चुका है। बाजार में एक दर्जन से अधिक किताबें नहीं हैं। विद्यार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि एनसीईआरटी का यही रवैया रहा तो जुलाई से पहले पुस्तकें मिलने की संभावना नहीं है।
यही हाल राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की किताबों का है। पुस्तकें न तो बाजार में आई हैं और न ही स्कूलों में पहुंची हैं। सरकारी स्कूलों में 1 मई से नया सत्र शुरू हो चुका है। विद्याधर नगर स्थित केंडलविक स्कूल की प्रिंसिपल राज राठौड़ ने कहा कि नया सत्र शुरू होने के बाद भी किताबें उपलब्ध नहीं हैं। कोर्स पूरा कराने की खातिर कई विषयों में तो फोटो कॉपी से पढ़ाना पड़ रहा है।
राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ (अरस्तु) के प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल ने कहा कि सरकार को सत्र शुरू करने की जल्दी तो रहती है, लेकिन पुस्तकों के लिए कुछ व्यवस्था नहीं की जाती। सरकार को चाहिए कि वह राजस्थान बोर्ड और पाठ्य पुस्तक मंडल को समय पर किताबें उपलब्ध कराने को पाबंद करे।
इन किताबों की है कमी : सीबीएसई की दसवीं की जियोग्राफी, इकोनोमिक्स, पोलिटिकल साइंस, 11वीं की सभी किताबें, 9वीं की जियोग्राफी, इकोनोमिक्स और 12वीं, 8वीं और 7वीं की कुछ किताबों की बाजार में कमी बनी हुई है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 9वीं से 12वीं तक की पुस्तकों की बिक्री ही शुरू नहीं है।
क्या कहते हैं अधिकारी : राजस्थान
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के प्रकाशन निदेशक एआर खान ने कहा कि किताबों के वितरण में देरी जरूर हुई है, लेकिन मई के अंत तक उपलब्ध करा दी जाएंगी। राज्य के 80 प्रतिशत स्कूलों में किताबें पहुंच चुकी हैं। शेष में 15 मई तक पहुंच जाएंगी।
राजस्थान पाठ्यपुस्तक मंडल के प्रोडक्शन इंचार्ज राजेंद्र कुमार जैन का कहना है कि हमने सभी नोडल केंद्रों पर किताबें भिजवा दी हैं, जहां से स्कूलों में किताबें पहुंचाने का काम जारी है। दुकानदारों के लिए भी व्यवस्था कर दी गई है।