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पकड़ी गैस चोरी

जयपुर. गोपालपुरा मोड़ के पास एक मकान के साथ खाली पड़ी जमीन पर बना है दो कोठरियों वाला ईंटों का अधूरा ढांचा। यहां वाहन से हर रोज रसोई गैस सिलेंडर उतरते हैं और दो में से एक डिलीवरी मैन उपभोक्ताओं के घर गैस पहुंचाता है।

साथी के लौटने तक दूसरा डिलीवरी मैन सभी सिलेंडरों की सील ढीली करता है। उपभोक्ता के घर से लौटा डिलीवरी मैन एक खाली सिलेंडर लेकर कोठरी में जाता है, जबकि दूसरा दो भरे सिलेंडर लेकर उसके पीछे-पीछे दाखिल होता है। थोड़ी देर में दो सिलेंडर लेकर एक जना बाहर आता है और दूसरा उन्हें डिलीवर करने साइकिल पर निकल जाता है।

दरअसल कीर्तिनगर कॉलोनी में रसोई गैस सिलेंडर से दूसरे में ट्रांसफर कर गैस चोरी का धंधा चल रहा था। सात दिन तक भास्कर संवाददाता आलोक खंडेलवाल ने पूरे मामले पर नजर रखी तथा वीडियो व स्टिल फोटोग्राफी की। मंगलवार को इस करतूत से पर्दा हट गया।

संवाददाता ने रसद विभाग को असलियत बताई, तो दो प्रवर्तन निरीक्षकों कुशाल बिलाला व चंदीराम जसवानी ने छापा मारकर एक सिलेंडर से दूसरे में गैस ट्रांसफर करने वालों को पकड़ा। यहां पांच सिलेंडरों से एक नया रीफिल तैयार कर ब्लैक में बेचा जा रहा था। यहां रखे 50 सिलेंडर में से कई की सील टूटी हुई थी। यह पॉइंट इंडेन गैस के गोपालपुरा मोड़ स्थित डीलर तेज गैस एंटरप्राइजेज का था।

कार्रवाई की जाएगी : डीएसओ वीपी सिंह ने कहा कि शहरभर के डिलीवरी प्वाइंट्स पर डिलीवरी मैनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसे अभियान के रूप में लिया जाएगा। तेज गैस एंटरप्राइजेज के पीएल पंजाबी ने बताया कि हम पकड़े गए डिलीवरी मैन से पूछताछ कर उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

डिलीवरीमैन को कम भुगतान
सुरेश के अनुसार यह काम वह लगभग एक साल से कर रहा है। उसे एजेंसी से केवल तीन रुपए प्रति सिलेंडर दिए जाते हैं। हॉकरों के अनुसार नियमानुसार डिलीवरीमैन को प्रति सिलेंडर सप्लाई के 8 रुपए मिलने चाहिए।

50 सिलेंडर पकड़े, दस जब्त
मौके पर मिले पचास सिलेंडरों में कई की सील टूटी हुई थी तथा तीन सिलेंडरों में आधी और उससे कम गैस थी। इनमें कोठरी में पाए गए तीन सिलेंडर तथा सात अन्य सिलेंडरों को सीज कर दिया गया। 40 सिलेंडरों को एजेंसी को उनकी निगरानी में सौंप दिया गया। त्रिवेणी गैस एजेंसी से बुलाए कार्यकर्ता से सिलेंडरों को तुलवाया गया तथा जब्त किए दस में से सात सुरक्षित रखने के लिए उसे सौंपे गए। शेष तीन को जब्त कर रसद कार्यालय ले जाया गया।

मौके पर मिली बांसुरी व पुरानी वेइंग मशीन
कार्रवाई में मौके पर एक लोहे की नलीनुमा बांसुरी मिली, जिससे वह सिलेंडर से गैस ट्रांसफर कर रहा था। यहीं एक पुरानी वेइंग मशीन भी मिली। 22 पर्चियों की काउंटरफाइल मिली, जिनके सिलेंडर डिलीवर करना बताया गया।

यहां भी घोटाला
इसी पॉइंट से डिलीवर किए गए सिलेंडरों की उपभोक्ताओं के घरों पर जांच की गई तो पता चला कि दो सिलेंडर उपभोक्ताओं के घर पहुंचे ही नहीं।

वेल्डिंग व इलेक्ट्रिक मशीनों के पास ही करता था गैस ट्रांसफर
जहां गैस ट्रांसफर की जा रही थी, वह स्थान लोहे के काम करने वाली दुकान का एक हिस्सा है। यहां वेल्डिंग, कटर आदि की इलेक्ट्रिक व गैस मशीनें लगी हुई हैं। ट्रांसफर करने में लीक होने वाली गैस से इन मशीनों के कारण बड़ा विस्फोट कभी भी हो सकता था।

मामला दर्ज
आरोपी सुरेश, हॉकर व एजेंसी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत बजाज नगर थाने में मामला दर्ज करा दिया गया है।

पांच से एक सिलेंडर, 500 रु. का फायदा
पांच सिलेंडरों से करीब 3-3 किलो गैस निकालकर एक सिलेंडर तैयार करते हैं। इसे वे 500 रुपए तक में बेचते हैं। यह सीधा मुनाफा है। ज्यादातर उपभोक्ता बिना तौल कराए ही सिलेंडर ले लेते हैं। वे यह भी नहीं जानते कि सिलेंडर में गैस कम भी हो सकती है।





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