अमृतसर. मैडिकल रिप्रैजैंटेटिव राजेश कुमार कद अपनी अंगुलियों को पीछे की तरफ मोड़कर कलाई तक मिला देते हैं। यही नहीं वे पैरों की उंगलियों को भी बड़ी सरलता से मोड़ लेते हैं।
कुदरत ने मुझको जो बख्शा है..
ऊंचाइयों को छूने का सपना देखने वाले राजेश अपने हाथों और पैरों की उंगलियों की लचक को कुदरती देन मानते हैं। टारगेट : वह लिम्का बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज करवाना चाहते हैं।