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गांव न जाने वाले डॉक्टरों पर जुर्माना 10 लाख

मुंबई. महाराष्ट्र के सरकारी कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों के लिए एक साल गांवों में प्रैक्टिस न करना महंगा पड़ेगा क्योंकि सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए इसका जुर्माना 10 लाख रुपए कर दिया है।

गांवों के स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के उपाय के रूप में उठाए गए इस कदम से एक तरफ डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले छात्र नाराज हैं तो सरकार इसे गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कह रही है।

फरमान के मुताबिक एमबीबीएस की डिग्री के बाद छात्रों को एक साल की इंटर्नशिप के तहत गांवों में जाना होगा और ऐसा न करने पर छात्रों पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना होगा जो कि पहले 1 लाख रुपए था।

विभिन्न टीवी चैनलों और एजेंसियों से मिल रही खबरों के मुताबिक मेडिकल छात्रों के संगठन ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि कई छात्र एमबीबीएस के बाद एमडी की डिग्री लेना चाहते हैं लेकिन इस फैसले से उनका काफी नुकसान होगा। दूसरी ओर, छात्रों का गुस्सा इस बात पर भी है कि सरकार ने पिछले चार दशकों में कोई नया मेडिकल कॉलेज नहीं खोला जबकि निजी क्षेत्रों में कॉलेज खुल रहे हैं और इस तरह के फैसलो से सरकार बेवहज छात्रों में तनाव पैदा कर रही है।

गौरतलब है कि आंकड़ों के अनुसार हर साल सरकारी कॉलेजों से करीब तीन हजार डॉक्टर डिग्री लेते हैं लेकिन उनमें से सिर्फ पांच सौ ही गांवों में प्रैक्टिस की शर्त का पालन करते हैं।





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