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कमल हसन की दशावतारम

परदे के पीछेकमल हसन द्वारा अभिनीत दस भूमिकाओं वाली अजीबोगरीब फिल्म ‘दशावतारम’ जून में प्रदर्शित होगी और इसका हिंदी संस्करण कुछ सप्ताह पश्चात प्रदर्शित होगा। ज्ञातव्य है कि दक्षिण में बनी एक फिल्म के हिंदी संस्करण में संजीवकुमार ने 9 भूमिकाएं अभिनीत की थीं, जो नाट्यशास्त्र में प्रतिपादित 9 रसों को अभिव्यक्त करने का प्रयास था। 53वर्षीय कमल हसन ने बचपन से अब तक 200 फिल्मों में काम करके लगभग 200 पुरस्कार जीते हैं, जिनमें चार राष्ट्रीय पुरस्कार भी शामिल हैं।

दक्षिण में रजनीकांत अवाम के नायक माने जाते हैं और कमल हसन प्रयोगधर्मी। रजनीकांत को मलाल है कि वह कमल हसन की तरह अभिनय नहीं कर सकता और कमल हसन का सपना है कि वह रजनीकांत की तरह अवाम का प्यार और मेहनताना प्राप्त करे।

इन भूमिकाओं का अर्थ है वेशभूषा और मेकअप में बार-बार परिवर्तन करना और संवाद अदाएगी में भी विविधता लाना। दिलीपकुमार ने ‘बैराग’ में व अभिताभ बच्चन ने ‘महान’ में तिहरी भूमिकाएं निभाई हैं। दोहरी भूमिकाओं के लिए सर्वकालिक मानदंड दिलीपकुमार की ‘राम और श्याम’ तथा अभिताभ बच्चन की ‘आखिरी रास्ता’ है। शाहरुख खान ने ‘डुप्लीकेट’ और ‘ओम शांति ओम’ में दोहरी भूमिकाएं अभिनीत की हैं, परंतु अपनी हर फिल्म में वे शाहरुख खान ही बने रहते हैं।

गुलजार की ‘अंगूर’ में संजीव कुमार ने इस खेल में नई ताजगी भर दी थी और शायद इसीलिए इस महान हास्य फिल्म को हास्य के वर्तमान कालखंड में भी कोई नहीं बना रहा है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी कमल हसन डांस डायरेक्शन और एक्शन के भी पुरोधा हैं और उन्होंने संवादहीन फिल्म भी बनाई है तथा एक फिल्म में मृत व्यक्ति की लंबी मनोरंजक भूमिका भी निभाई है। उन्होंने ‘चाची-420’ में महिला की भूमिका भी अभिनीत की हैं।

मुंबई की सारिका ने भी कमल की तरह बाल कलाकार की हैसियत से काम शुरू किया था और सारिका व कमल का विवाह भी लंबे समय तक चला। इस संबंध के टूटने के समय कमल हसन अपनी पहली हिंदी फिल्म ‘हे राम’ बना रहे थे, जिसमें रानी मुखर्जी के साथ उनके कुछ साहसी प्रेम दृश्य भी थे।

इस फिल्म के एक दृश्य में कमल ने एक बंदूक को स्त्री में बदलते हुए ट्रिक फोटोग्राफी से प्रस्तुत किया था। उस दौर में उनकी सैक्स फंतासी अजीबोगरीब थी। बाद में बनाई गई जुड़वा भाइयों की एक फिल्म ‘अभय’ में भी उनकी मानसिक विकृति की झलक प्रस्तुत थी। ‘ईश्वर’ और ‘विरासत’ जैसी फिल्मों के मूल संस्करण में काम करने वाला कमल हसन कुछ समय के लिए वात्सायन के कालखंड में चला गया था। देखना यह है कि क्या दशावतारम में वह लौट आया है। देहधर्म की राह में बहुत कोहरा और धुंध छाई रहती है। मार्गदर्शक जुगनू नजर नहीं आते।





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आपके विचार
animesh patel
Thursday, 8th May 2008, 10:01
Hi कमल हसन Best of luck, kuch hat kar kar dikhana .
Rajeev Ranjan
Thursday, 8th May 2008, 15:13
This Article is very informatic. Truly these types of articles should be appriciated. Very thanks to writes ans paper also