भोपालकेंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल शहर की आबोहवा अन्य शहरों की तुलना में बेहतर है। रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल की हवा में सांस के साथ शरीर के अंदर जाने वाले रेस्पायरेबरल सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर के कणों की मात्रा 132 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है, जो कि अन्य शहरों की तुलना में कहीं कम है।
शहरवासी भी इस खबर से बहुत खुश हैं। सभी इसे अपनी उस मेहनत के फल के रूप में देखते हैं जो उन्होंने प्रदूषण कम करने के लिए पौधरोपण व पौधों के संरक्षण के लिए की। सभी का कहना है कि प्रदूषण कम करने में तो हम सफल रहे हैं पर इसे लगातार मेंटेन करना बड़ी चुनौती है। शहरवासियों ने अगला लक्ष्य शहर को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त करना बताया। चर्चा के दौरान शहर के हार्ट स्पेशलिस्ट व अस्थमा विशेषज्ञों ने यह खबर हार्ट व अस्थमा के मरीजों के लिए अच्छी बताई साथ ही उन्हें कुछ सावधानियों को पूर्व की तरह बरतने की सलाह भी दी।
एमडी मेडिसिन, डीएम रेस्पीरेटरी एवं क्रिटीकेयर डा. पीएन अग्रवाल बताते हैं कि रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल की आबोहवा बाकि शहरों की तुलना में अच्छी है। शहर में हाल ही में बसे नई इलाकों में प्रदूषण कम है अत: इन क्षेत्रों में रहने वालों के लिए यह अच्छी खबर साबित हो सकती है। इन क्षेत्रों में रहने वालों को दवाएं व थैरेपी तो सामान्य रूप से ही लेनी होगी, बेहतर आबोहवा उनके स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव डालेगी। शहर की आबोहवा को और बेहतर बनाने व शहर को प्रदूषण मुक्ते करने के लिए सभी को अपने आसपास के क्षेत्र में पौधरोपण करना चाहिए।
हार्ट स्पेशलिस्ट डा. पीसी मनोरिया का कहना है कि यह एक अच्छी खबर है कि भोपाल शहर की आबोहवा बाकि शहरों की तुलना में अच्छी है। उसके बाद भी हार्ट के मरीज को अपना ध्यान तो रखना ही चाहिए। वे बताते हैं कि मरीज समय पर दवा लें और घूमने जरूर जाएं। अस्थमा विशेषज्ञ डा. लोकेंद्र दवे कहते हैं कि भोपाल में प्रदूषण कम है पर दमा रोगी को हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए। इन्हेलर, दवाइयां, फिल्टर का उपयोग उसे हमेशा करना चाहिए।
मेहनत का फल
एमपी नगर निवासी अविनाश सक्सेना का कहना है कि शहर की आबोहवा अच्छी है इस खबर ने दिल खुश कर दिया। यह परिणाम है शहरवासियों की उस मेहनत का जो उन्होंने पौधरोपण व उनका संरक्षण कर प्रदूषण को कम करने के लिए की। बढ़ गई हमारी जिम्मेदारी: कोलार रोड निवासी जगदीश शर्मा का कहना है कि हमारी जिम्मेदारी अब और बढ़ गई है। इस खबर के बाद अन्य शहर भी प्रदूषण कम करने का प्रयास करेंगे पर हमें अपनी उपलब्धि को लगातार मेंटेन करना है व शहर को प्रदूषण फ्री बनाना है।
शहरवासियों की रुचि का परिणाम:
गुलमोहर निवासी साकेत द्विवेदी का कहना है कि सरकार प्रदूषण संबंधी आंकड़े तो जारी करती है पर इसे दूर करने का प्रयास तभी सफल होता है जब शहरवासी प्रदूषण कम करने में रुचि लें। भोपालवासियों की रुचि का परिणाम है कि प्रदूषण के मामले में हमने अन्य शहरों को मात दी है।
अगला लक्ष्य शहर को प्रदूषण मुक्त बनाना:
अरेरा कॉलोनी निवासी दीपक श्रीवास्तव का कहना है कि अन्य शहरों की तुलना में शहर की आबोहवा के बेहतर होने का पूरा श्रेय शहरवासियों को जाता है। प्रदूषण कम करने में सफलता पाने के बाद हमारा अगला लक्ष्य है शहर को पूरी तरह स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त बनाना।