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भारतीय वैज्ञानिकों ने रचा इतिहास

कोल्हापुरभारत के दो शोधकर्ताओं ने पहली बार यह साबित कर दिया है कि न सिर्फ गर्भाशय, बल्कि स्त्री के समूचे प्रजनन तंत्र में वयस्क स्टेम सेल्स मौजूद होते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, इन्हें सुरक्षित प्रणालियों की मदद से निकालकर शरीर के अन्य अंगों के लिए कोशिकाओं के निर्माण में इनका उपयोग किया जा सकता है। भारतीय शोधकर्ताओं की इस खोज ने स्टेम सेल के शोध में भारत को अमेरिका जैसे विकसित राष्ट्रों से कई कदम आगे खड़ा कर दिया है।

गौरतलब है कि हाल ही में आस्ट्रेलिया के शोधकर्ता कैरोलिन जार्जेट ने स्त्री के गर्भाशय में स्टेम सेल की मौजूदगी का पता लगाया था, लेकिन कोल्हापुर के गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सतीश पत्की और पुणो स्थित नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंसेज (एनसीसीएस) के सीनियर साइंटिस्ट रमेश भोंडे ने मंगलवार को कोल्हापुर में बताया कि न केवल गर्भाशय, बल्कि फैलोपियन ट्यूब और डिम्ब ग्रंथियों में भी स्टेम सेल की मौजूदगी होती है।

दोनों शोधकर्ता अब अपनी खोज को पेटेंट कराने की योजना बना रहे हैं। उनकी खोज को प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ‘मेडिकल हायपोथिसिस’ ने प्रकाशन के लिए चुना है। शोधकर्ताओं ने बताया कि एम्ब्रायोनिक सेल्स भी स्टेम सेल के स्रोत होते हैं, लेकिन उन्हें परंपरागत तरीके से प्राप्त करना बेहद मुश्किल है।

गर्भाशय के कामकाज को देखकर मिली प्रेरणा : डॉ. पत्की ने बताया कि उन्हें गर्भाशय के कामकाज को देखकर अपने शोध की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा, ‘गर्भाशय में रोग प्रतिरक्षण क्षमता गजब की होती है। वह भ्रूण जैसे बाहरी वस्तु को भी जिस तरह से स्वीकार कर नौ महीने तक उसका पोषण करता है, वह किसी अंग प्रत्यारोपण से कम नहीं है।’

उन्होंने कहा कि कृत्रिम रूप से अंग प्रत्यारोपण में उसे शरीर द्वारा अस्वीकार्य कर देने की आशंका रहती है, पर गर्भाशय ऐसा नहीं करता।

अब तक की उपलब्धियां :

प्रयोगशाला में गर्भाशय से लिए गए स्टेम सेल से किडनी, लिवर, वसा, ब्रेन और अमाशय के बीटा सेल्स सफलतापूर्वक तैयार किए गए हैं। इसके अलावा हृदय की धड़कने वाली कोशिकाओं का भी निर्माण हो चुका है।





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rohit
Thursday, 8th May 2008, 5:14
bhai sahab mast khoj ki hai... good luk in future..