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ऑडिट शुरू, अधिकारियों में खलबली

बीकानेर.team नगर परिषद के स्तर पर होने वाले विकास कार्यो की समीक्षा के लिए पिछले कई दिनों ने ऑडिट-टीम डेरा डाले हुए है। टीम के अभी कम से कम सात दिन यहां रहने की संभावना है और जिस तरह टीम के अंकेक्षक ऑडिट-आब्जेक्शन बना रहे हैं उसमें अधिकारियों में खलबली मची हुई है।

पता चला है कि भास्कर की ओर से उठाए गए डीजल के उपयोग पर सवाल पर अंकेक्षण-समिति ने तथ्य मंगवाए हैं और इस बात पर हैरत जताई है कि इतनी बड़ी मात्रा में जारी होने वाले डीजल का कोई हिसाब-किताब ही नहीं है। इसके अलावा निर्माण शाखा के स्तर पर होने वाले सड़क आदि के कार्यो की गुणवत्ता रिपोर्ट और उपयोगिता प्रमाणपत्रों की भी जांच चल रही है।

विदित रहे कि नगर परिषद के पास केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत काफी राशि पहुंचती है। इस राशि के उपयोग पर नजर रखने के लिए हर साल अंकेक्षण समिति निकायों तक आती है। सामान्य अंकेक्षण के अलावा यह समिति अनियमितताओं की शिकायतों पर भी जांच करती है।

बीकानेर नगर परिषद के खिलाफ पार्षदों ने शिकायतें भी काफी कर रखी हैं। समिति के पास भी शिकायतें पहुंची हैं। इन शिकायतों के आधार पर भी जांच का काम चल रहा है। 15 मई तक जांच का काम चलेगा और इसके बाद ऑडिट-ऑब्जेक्शन पर अधिकारियों के साथ समिति के सदस्यों की चर्चा होगी।

अगर परिषद अधिकारी अपने तर्क से समिति के सदस्यों को संतुष्ट कर देते हैं तो ठीक है वर्ना सारे ऑडिट-ऑब्जेक्शन पर अधिकारिक रूप से जिम्मेवार मानते हुए दोषी के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की जाएगी।

उपसभापति के कक्ष में ऑडिट
नगर परिषद में ऑडिट के लिए पहुंचे अधिकारियों को जांच कार्य करने के लिए अलग से स्थान देने की समस्या अधिकारियों के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है। पहले इन अधिकारियों को हॉल में बिठाया गया लेकिन इस बीच बाल-विवाह पर संगोष्ठी और आने वाले दिनों में बजट पर बैठक को देखते हुए ऑडिटर्स को नगर परिषद उपसभापति हारुन राठौड़ के कक्ष में शिफ्ट कर दिया गया।

ऑडिटर्स को उपसभापति के कक्ष में शिफ्ट करते समय उपसभापति हारुन राठौड़ की सहमति नहीं ली गई और इस वजह से राठौड़ नाराज हैं। उनका कहना है कि दूसरे अधिकारियों के कक्ष भी इस कार्य के लिए उपयोग लिए जा सकते थे।

अगर इस कक्ष का उपयोग करना भी था तो कम से कम इनफॉर्म तो किया होता। राठौड़ का कहना है कि सभापति के कक्ष में सामान्यतया फरियादी आते हैं। ऐसे में सामान्य कामकाज के लिए आने वाले पार्षद कहां बैठेंगे, यह भी सवाल है।





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