जयपुर. सरकार हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष अजयपालसिंह के पीछे पड़ गई है। कॉपरेरेट पार्क के लिए सरकार ने बुधवार को 166 बीघा जमीन की अवाप्ति के आदेश दिए। इसमें से 23 बीघा (5.53 हेक्टेयर) जमीन यूनिक बिल्डर्स के नाम है। यह कंपनी अजयपाल के बेटे की है।
इस जमीन का बाजार भाव करीब दो करोड़ रु. बीघा है। अजमेर रोड पर रामचंदपुरा में इस जमीन पर यूनिक बिल्डर्स ने ‘माई हवेली’ नामक आवासीय योजना बना रखी है। इस योजना का कुछ दिन पहले ही जेडीए से अनुमोदन हुआ है। इसमें काफी लोग बुकिंग भी करवा चुके हैं। जेडीए ने इसके लिए ग्रुप हाउसिंग पट्टा जारी कर रखा है।
कॉपरेरेट पार्क के नाम पर : सरकार का इरादा जयपुर में इस तरह के आठ-दस पार्क बनाने का है, जिससे बड़ी कंपनियों और औद्योगिक घरानों को ऑफिस खोलने के लिए जगह दी जा सके। प्रताप नगर, सांगानेर हवाई अड्डा, अजमेर रोड, जगतपुरा सहित कई जगहों पर ऐसे कॉपरेरेट पार्क प्रस्तावित हैं।
दो दिन पहले ही अधिकारों में की थी कटौती : सरकार ने दो दिन पहले ही अजयपालसिंह के अधिकारों में कटौती की थी।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के इशारे के बावजूद अजयपाल ने दो दिन पहले ही पद छोड़ने से इनकार कर चुके हैं। इससे पहले सरकार ने बोर्ड की बैठक में किए गए फैसलों को लागू करने पर रोक लगा दी थी।
दिनभर रही इस्तीफे की चर्चा:
भूमि अवाप्ति की खबर के बाद राजनीतिक हल्कों और हाउसिंग बोर्ड में सरदार अजयपालसिंह के इस्तीफे की चर्चाएं रहीं। भाजपा नेतृत्व ने उनके इस्तीफे की पुष्टि नहीं की। सरकारी सूत्रों ने भी अजयपालसिंह का इस्तीफा मिलने से इनकार किया।
अब रास्ता क्या?
अजमेर रोड पर जमीन अवाप्ति के मामले में यूनिक बिल्डर्स अथवा दूसरा खातेदार सरकार की जल्दबाजी के खिलाफ कोर्ट से स्टे ला सकता है? सूत्रों का कहना है कि अवाप्ति से पहले नियमानुसार खातेदारों को जमीन अवाप्ति का नोटिस दिया जाना चाहिए था।
अजयपाल निशाने पर क्यों?
सरकार के कुछ लोगों की नजर अजयपाल के वैशालीनगर स्थित भव्य आवास पर है। आठ प्लाटों पर बने इस बंगले में वसुंधरा राजे रहीं थीं। इसके बाद वे मुख्यमंत्री बनीं। यह मकान इसीलिए शुभ माना जाता है।
पिछले दिनों हाउसिंग बोर्ड की अवाप्ति से कई जमीनों को छोड़ा गया था, इनका हिसाब-किताब भी एक कारण हो सकता है।
मुख्यमंत्री की इच्छा के बावजूद लिबर्टी प्रोजोन को जमीन देने का प्रस्ताव निरस्त करना व प्रताप नगर में आईसीआईसीआई बैंक को जमीन देने के विरोध के पीछे भी अजयपाल सिंह को ही माना जा रहा है।
समय खराब है, मुझे कुछ नहीं कहना
आप ही के प्रोजेक्ट की जमीन क्यों अवाप्त की गई?
-प्लीज, मुझे कुछ भी नहीं कहना।
आरोप है कि आपका मुख्यमंत्री से हिसाब का कोई मसला है?
-मैं अभी कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।
सरकार आप के खिलाफ एक के बाद एक कार्रवाई कर रही है, इसका क्या कारण है?
-प्लीज हमें छोड़ दीजिए। वैसे ही समय बहुत खराब है।