जोधपुर. जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी ने ७५ प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले छह विद्यार्थियों के अभ्यावेदन अस्वीकार कर दिए हैं। विवि ने सभी पहलुओं की जांच कर आवेदन नामंजूर करते हुए टिप्पणी की कि इन विद्यार्थियों को परीक्षा की अनुमति देना सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना होगी।
कुलपति प्रो. लोकेश शेखावत ने बताया कि कम उपस्थिति के कारण परीक्षा से वंचित रहीं छात्राओं की याचिका पर राजस्थान उच्च न्यायालय ने जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया था।
इसके साथ ही दोनों छात्राओं को इस आदेश की प्रतिलिपि के साथ कुलपति प्रो. लोकेश शेखावत के सम्मुख अभ्यावेदन प्रस्तुत करने को कहा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि याचिका मंजूर होती है तो इन छात्राओं को पूरक परीक्षा में बैठने का मौका दिया जा सकेगा। लेकिन यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट कर दिया है कि यूनिवर्सिटी की पीजी कक्षा में पूरक परीक्षा का प्रावधान ही नहीं है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कुलपति ने इन छात्राओं से मिल इनका अभ्यावेदन लिया व उनसे विचार विमर्श किया। कुलपति ने विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. पीएम सिंघवी, सिंडीकेट सदस्य डॉ. मूलसिंह राठौड़ व प्रो. एमके भंडारी की मौजूदगी में छात्राओं से चर्चा की।
यूनिवर्सिटी ने फैसला किया कि नियमानुसार कुलपति छह प्रतिशत से ज्यादा किसी विद्यार्थी को उपस्थिति में रियायत नहीं दे सकता। सभी तथ्यों की जांच कर ली गई है तथा अब इन विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल करना संभव नहीं है।
क्या था मामला
प्राणी शास्त्र विभागाध्यक्ष ने6 विद्यार्थियों की उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम होने का हवाला देते हुए परीक्षा से बैठने से वंचित कर दिया था। इन विद्यार्थियों का आरोप था कि विभागाध्यक्ष ने भेदभावपूर्ण नीति से इन्हें परीक्षा से वंचित किया है। जेएनवीयू से मांग करने के बाद भी जब इनकी बात नहीं मानी गई तो इन विद्यार्थियों में से दो छात्राओं ने न्यायालय की शरण ली।