जोधपुर.
इन बच्चों को शादी का मतलब भी नहीं है, मगर दूल्हा-दुल्हन बन कर सात फेरे ले रहे थे। महिलाएं गीत गा रहीं थी तो माता-पिता कन्यादान करने में लगे हुए थे। पाली रोड पर शहर से बीस किमी की परिधि में आखातीज को हुए इस बाल विवाह की भनक प्रशासन को लगी और न ही पुलिस को। बारात आई और मासूम दुल्हन को लेकर चली गई।
बाल विवाह रोकने के लिए सरकार ने शारदा एक्ट तो बना दिया, मगर गांवों की परंपरा से यह सामाजिक बुराई नहीं मिट पाई। हालांकि बुधवार को जिला प्रशासन व पुलिस महकमा बाल विवाह रोकने के लिए मुस्तैद था, मगर फिर भी शहर की सीमा से लगते कई गांवों में बाल विवाह होते रहे। भास्कर टीम ने शहरी आबोहवा से प्रभावित पाली रोड, बाड़मेर रोड व जैसलमेर रोड के एक दर्जन गांवों में बाल विवाह देखने पहुंची तो कई जगह मासूमों को शादी के बंधन में बंधते देखा।
पटवारी से थानाधिकारी तक पाबंद
बाल विवाह रोकने के लिए कलेक्टर नरेशपाल गंगवार ने सभी तहसीलदारों व पटवारियों को पाबंद कर रखा है। वहीं ग्रामीण एसपी संजीबकुमार नार्जारी व सिटी एसपी मालिनी अग्रवाल ने भी थानाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों के गांवों में बाल विवाहों पर नजर रखे तथा उन्हें रुकवाएं। इन अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि वे बाल विवाह की सूचना पुलिस तथा प्रशासन के कंट्रोल रूम में अथवा अधिकारियों को सीधे दे सकते हैं ताकि ऐसी शादियां रुकवाई जा सकें।
प्रशासन ने रुकवाया बाल विवाह
सूरसागर थाना क्षेत्र में शहर से पंद्रह किमी दूर सोढ़ों की ढाणी में बुधवार को नरपसिंह की पुत्री का बाल विवाह प्रशासन व पुलिस ने रुकवा दिया। खुद नरपतसिंह ने कलेक्टर को शिकायत की कि उसके बड़े भाई जालमसिंह नाबालिग बेटी का विवाह कराने पर आमादा हैं। शाम पांच बजे ही पाली से बारात आने वाली है।
कलेक्टर के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट दुर्गेश बिस्सा ने तत्काल सूरसागर थानाधिकारी बनवारीलाल धायल को सूचित कर बाल विवाह रुकवाने को कहा। थानाधिकारी के साथ तहसीलदार मुकेश चौधरी व पटवारी, आरआई, सीडीपीओ की महिला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गई।
पुलिस ने जालमसिंह को समझाया तथा कानून की हवाला देते हुए सजा से भी अवगत कराया। जालमसिंह ने उसी वक्त शादी नहीं करने का वादा किया तथा पुलिस को लिखित में दे दिया। पाली में सूचित कर बारात को भी रुकवा दिया। देर रात गुपचुप शादी करने की आशंका के कारण पुलिस को वहीं पर तैनात कर दिया।