इंदौर. प्रदेश का 35 साल पुराना यूनिवर्सिटी एक्ट समय की मांग के मुताबिक बदलने की हलचल तेज हो गई है। प्रदेश की 11 यूनिवर्सिटी के कुलपति और 6 संस्थानों के निदेशक इसके लिए एकजुट हैं और सालभर पहले गठित मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय संघ का पंजीयन कराने के बाद एक बैठक भी कर ली है। यही संघ राज्य शासन को बदलाव का प्रस्ताव भेजेगा।
लंबे समय से परीक्षा संचालन, सेमेस्टर सिस्टम के मुताबिक मूल्यांकन, ग्रेडिंग और पाठ्यक्रम रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए नए एक्ट की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके लिए कुलाधिपति की सहमति से संघ का गठन किया था।
इसके सचिव और बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी भोपाल के कुलपति भूपालसिंह ने बताया मौजूदा एक्ट 1973 का है। उसके बाद शिक्षा का परिदृश्य बदल गया है इसलिए सुधार की जरूरत है। इसके लिए सभी कुलपतियों से सुझाव मांगे हैं।
देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. भागीरथ प्रसाद ने बताया मुख्य मुद्दा फीस है। शासन ने यूनिवर्सिटी को दी जाने वाली सहायता 10 साल से नहीं बढ़ाई है। मजबूरन सेल्फ फाइनेंस कोर्सेस के जरिए फीस बढ़ाना पड़ रही है। ऐसी ही कई विसंगतियां छात्रों को सुविधाओं से वंचित कर रही हैं।