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दहेज में मिली बच्ची की मुस्कान

रायपुर. marriage अक्षय तृतीया पर टाटीबंध आर्यसमाज ने एक युवक ने विधवा से ब्याह रचाकर न केवल उसे सहारा दिया, बल्कि विधवा विवाह को लेकर समाज की बदलती सोच पर मुहर भी लगा दी।शादी की रस्मों के दौरान बार-बार अपने नए पापा की गोद में समाती बच्ची, आंखों की चमक से खुशी का इजहार करता दूल्हा और सकुचाई सी नई दुल्हन। आर्यसमाज मंदिर का माहौल ही बदला हुआ था।

पत्नी की बेटी को अपनी बेटी सा ही प्यार और परवरिश देने का इच्छुक युवक भरत साहू दुल्हन को शादी के बाद हर सहूलियत देना चाहता है, जो एक सबल पति दे सके। शादी की सारी रस्मों के तहत युवती को हल्दी लगाई गई तो उसके चेहरे से पुराने ददरें की स्याही हटकर एक नई रौनक आ गई।

आज फेरों के दौरान बार-बार बच्ची दोनों के बीच घुसने की कोशिश करती रही और दुल्हन के घरवाले रोकते रहे। शादी के बाद विदाई में मां वैसे ही पछाड़ें खाकर रोई जैसे पहली बार बेटी को विदा करते हुए रोई थी, वहीं दूल्हा बेटी पूजा को संभालते हुए जिम्मेदार दामाद की तरह आश्वासन देता रहा।

किस्मत ने छला
दूसरी शादी यानी सेकंड क्लास जिंदगी, जैसी सोच को अब झुठलाया भी जा सकता है। मानकों को तोड़ते हुए ऐसे लोग सामने आ रहे हैं। इसी के तहत भरत साहू ने केशरी से विवाह का फैसला किया, जो कि एक बच्ची की मां है। कम उम्र में केशरी की शादी हो गई।

पहले पति की दुघर्टना में मौत के बाद पेरेंट्स ने दूसरी शादी कर दी लेकिन इस बार भी किस्मत के हाथों वह छली गई। बच्ची के जन्म के कुछ दिनों बाद दूसरा सहारा भी छिन गया। मायके लौटने पर वहां के आलम थोड़े बदले से लगे। रोज-रोज की परेशानियों से बचाने के लिए केशरी के पिताजी खुद उसे एक एनजीओ आनंदांश में छोड़ गए। यहां रहते काम के साथ उसने 5वीं परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की।

ताकि मिले पिता : इसी बीच भरत साहू से उसकी मुलाकात हुई और यहां से केशरी की जिंदगी का दूसरा चैप्टर शुरू हुआ। राजधानी के मीरा होटल में काम करने वाला नौजवान शुरुआत से ही केशरी के प्रति गंभीर था लेकिन आगे बढ़ते हुए ठिठक जाता था।

वजह, खुद का अनब्याहा होना। बगैर मां-बाप के युवक ने सबसे पहले अपनी मौसी से बात की। उन्हें राजी करने के बाद शुरू हुआ केशरी को मनाने का सिलसिला। दो-दो दफे इस तरह ठगी गई केशरी इस बार मन जोड़ने का साहस नहीं कर पा रही थीं।

इस बीच बच्ची पूजा अपने नए संभावित पापा से खूब हिलमिल गई और यही बात भरत के पक्ष में गई। लंबी कोशिश के बाद आखिरकार उसने हां कर दी लेकिन इस वादे के साथ कि वह बच्ची को असली पिता का प्यार देगा।





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