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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. अक्षय तृतीया का पर्व गुरुवार को मनाया जाएगा। शुक्रास्त के कारण इस अविजित मुहूर्त पर भी शादी-ब्याह वर्जित हैं, अलबत्ता बच्चे गुड्डे-गुड़ियों का ब्याह रचाएंगे। माना जाता है कि देवउठनी एकादशी और अक्षय तृतीया के दिन विवाह के लिए मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं पड़ती।
8 मई को वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया पर अक्षय तृतीया के रूप में मनाई जाएगी, लेकिन शुक्र अस्त होने के कारण इस दिन शादियां नहीं हो सकेंगी। मई और जून पूरे दो महीने शादी का कोई मुहूर्त नहीं है।
प्रसिद्ध ज्योतिषी एवं वास्तुविद् पं. दीपक शर्मा बताते हैं कि शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार शुक्र को मानव शरीर के रज तथा इंद्रियों का कारक ग्रह माना गया है, जो विवाह संस्कार, गृहस्थ जीवन एवं संतानोत्पत्ति का माध्यम है, इसलिए शुक्र अस्त होने की अवधि में मान्यतास्वरूप स्त्री एवं पुरुष के नवजीवन में प्रवेश मांगलिक नहीं माना जाएगा।
शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन से ही सतयुग का आरंभ हुआ था तथा नर-नारायण व भगवान परशुराम का अवतार भी इसी दिन रात्रि के तीसरे प्रहर में हुआ था। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर सत्तू का भोग लगाया जाएगा।
मुहूर्तो को न मानने वाले अक्षय तृतीया पर शादी-ब्याह रचाएंगे, ग्रामीण इलाकों में इस दिन विवाह होने की उम्मीद है। इधर बच्चों में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह है। बाजार में आज गुड्डे-गुड़ियों की जमकर बिक्री हुई। शनिचरी, बृहस्पति, सदर बाजार के अलावा सड़कों के किनारे कई दुकानों में इसकी बिक्री की जाती रही। बच्चे कल गुड्डे-गुड़ियों का ब्याह रचाएंगे।