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जोगी के खिलाफ प्रत्याशी टटोल रही भाजपा

बिलासपुर. मंगलवार को राजधानी में जिस वक्त पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के खिलाफ कवर्धा के साथ अपनी मरवाही सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा कर रहे थे, भाजपा कोटमी (मरवाही) में उनके खिलाफ व्यूह रचना में जुटी हुई थी।

अनुसूचित जनजाति सम्मेलन के बहाने श्री सिंह ने मंच से न केवल कांग्रेसी सरपंचों को भाजपा में शामिल किया, बल्कि अपने दो दिग्गज नेताओं को भी भरपूर तवज्जो दिया। समझा जाता है कि श्री जोगी के खिलाफ चुनावी ताल ठंोंकने में इनकी दावेदारी पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि पेंड्रा विकासखंड के अंतर्गत सोन नदी के किनारे बसे कोटमी गांव की पहचान ऊरांव, गोंड़ आदिवासी समुदाय के देवता बूढ़ा देव के मंदिर से होती है। आदिवासी समुदाय की राजनीति में जोर आजमाइश करने वाले नेता स्वर्गीय भंवर सिंह पोर्ते के समय से कोटमी से ही अपनी शुरुआत करते रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने भी इसी हिसाब से बूढ़ा देव मंदिर परिसर के उन्नयन का ही बीड़ा नहीं उठाया, बल्कि मरवाही में जोगी परिवार को शिकस्त देने वाले नेता की टोह भी ली। इस दृष्टि से अनुसूचित जनजाति के जिलाध्यक्ष गुलाब सिंह सलाम एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य ध्यान सिंह को कार्यक्रम में मिली तवज्जो को खास अहमियत दी जा रही है।

मरवाही विधानसभा क्षेत्र के पिछले चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने 54 हजार वोटों की बढ़त हासिल कर भाजपा के लिए गहरी खाई खोद दी। इस सीट से श्री जोगी के इस्तीफे तथा निकटतम प्रतिद्वंद्वी नंदकुमार साय(भाजपा) द्वारा हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने के बाद चुनाव पर रोक लगने से क्षेत्र प्रतिनिधित्वविहीन हो गया है।

भाजपा ने 4 साल के लंबे अंतराल में मरवाही का किला फतह करने के लिए विकास कार्यो की झड़ी लगा दी, परंतु भाजपा की गुटीय राजनीति के चलते यहां मुख्यमंत्री का प्रवास व सम्मेलन सीमित होकर रह गए। 4 साल में मुख्यमंत्री ने यहां तीसरी मर्तबा दौरा किया।

बहरहाल मरवाही क्षेत्र के जरिए प्रदेश की राजनीति के शीर्षस्थान पर पहुंचे अजीत जोगी के लिए यह सीट महत्वपूर्ण हो गई है। क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के कारण कांग्रेस इस सीट की टिकट जोगी परिवार को दे सकती है। भाजपा की चिंता इसी को लेकर है कि ऐसा उम्मीदवार ढूंढ़ा जाए, जो दबाव से ऊपर उठकर मुकाबला कर सके। गुलाब सिंह एवं ध्यान सिंह का नाम इसी लिहाज से कट्टर भाजपाई के रूप में लिया जाता है।

गौरतलब है कि मरवाही से भाजपा के विधायक रामदयाल उइके से सीट खाली कराकर श्री जोगी के उपचुनाव लड़ने के दौरान भाजपा ने अमर सिंह खुसरो नामक युवा प्रत्याशी को मैदान में उतारा, परंतु वह चुनावी छल, बल के सामने ढेर हो गया।

भाजपा इस चुनावी कड़वाहट को ध्यान में रखकर नई व्यूह रचना में जुटी है, जिसमें निष्ठा व दृढ़ता कूट-कूटकर भरी हो। मरवाही में जोगी परिवार के सामने भाजपा के लिए ऐसे कद्दावर नेता की खोज करना आसान नहीं है। बावजूद इसके सम्मेलन के जरिए पार्टी ने आदिवासियों को यह बताने की कोशिश की है कि वह उनकी असली रहनुमा है तथा समाज की देखरेख, विकास में कसर नहीं छोड़ेगी।





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