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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. पति ने प्रताड़ित कर गर्भवती अवस्था में छोड़ दिया था। निचले कोर्ट के दोषमुक्ति आदेश को हाईकोर्ट ने निरस्त कर पति को ठहराया क्रूरता और प्रताड़ना का दोषी। दहेज प्रताड़ना और क्रूरता के मामले में निचले कोर्ट से बरी आरोपी को हाईकोर्ट ने दोषी पाया है।
जस्टिस टीपी शर्मा की सिंगल बेंच ने निचले कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही आरोपी पर कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
तालापारा निवासी शरीफुन्निसा उर्फ निशा खान का विवाह वर्ष 1990 में कासिम खान के साथ हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही उन्हें पति और ससुराल के अन्य सदस्यों द्वारा प्रताड़ित किया जाने लगा था। इसी दौरान जब वे गर्भवती थीं, तो पति ने उन्हें मारपीट कर घर से निकाल दिया।
श्रीमती निशा एक स्कूल में सर्विस करने लगीं। उन्हें घर से आने-जाने के दौरान पति द्वारा रास्ते में रोककर जान से मारने की धमकी दी जाती और पिटाई की जाती। कई बार उन्हें गर्भस्थ शिशु को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। त्रस्त होकर निशा ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई, जिस पर धारा 324, 498 ए के तहत अपराध दर्ज किया गया।
ट्रायल कोर्ट में गवाही के दौरान उनका, उनके पिता, पड़ोसियों और जिनके सामने उनकी पिटाई की गई और प्रताड़ित किया गया, उनके बयान लिए गए। सभी गवाहों से निशा खान की बात सही साबित हुई, लेकिन कोर्ट ने आरोपी कासिम को इस आधार पर दोषमुक्त कर दिया कि प्रकरण में उसके परिजनों के बयान पुलिस ने दर्ज नहीं किए और दहेज की मांग भी साबित नहीं हो पाई है।
इसके खिलाफ सुश्री निशा ने वकील हमीदा सिद्दीकी के माध्यम से हाईकोर्ट में रिविजन (अपील) दायर की। याचिकाकर्ता की वकील ने कोर्ट के समक्ष तर्क रखा कि विवाहित महिला के प्रति क्रूरता और प्रताड़ना सिद्ध करने के लिए दहेज की मांग साबित करना जरूरी नहीं है।
उन्होंने मामले में उपलब्ध सबूतों के आधार पर दोषी को सजा देने की मांग की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने तर्को से सहमत होकर निचले कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए कासिम को दोषी करार दिया है।