नई दिल्ली.
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पी. वेणुगोपाल को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक पद पर बहाल किए जाने के आदेश के बाद विपक्ष द्वारा स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदास से इस्तीफे की मांग भी तेज हो गई है। वहीं रामदास का कहना है कि इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा इस्तीफे की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए रामदास ने कहा कि इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता है क्योंकि संसद द्वारा कानून को पारित किए जाने के बाद वेणुगोपाल को पद से हटाया गया था।
उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले को पढ़ने के बाद हम कोई निर्णय लेंगे। संसद को भ्रमित करने का भी कोई सवाल नहीं उठता है। दरअसल, कानून को संसद में पारित किया गया था।
गौरतलब है कि न्यायाधीश तरूण चटर्जी और एच. एस. बेदी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए आज वेणुगोपाल को निदेशक पद से हटाए जाने की कार्रवाई को असंवैधानिक करार दिया था।
खंडपीठ ने कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि वेणुगोपाल को व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाते हुए 'अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा और शोध संस्थान, चंडीगढ़ संशोधन कानून 2007' को लागू किया गया था।
इस कानून के तहत एम्स निदेशक का कार्यकाल पांच वर्ष या फिर पद से अवकाश प्राप्त करने की उम्र सीमा 65 वर्ष कर दी गई थी। इस कानून के लागू होने के बाद ही स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदास ने नवंबर 2007 में वेणुगोपाल को एम्स के निदेशक के पद से बर्खास्त किया था।
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