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कीमोथेरेपी का असर व साइड इफेक्ट बताएगा नया टेस्ट

पुणे. पुणे की एक फर्म ने ऐसा मेडिकल टेस्ट विकसित किया है, जिससे कैंसर के रोगी सटीकता के साथ यह पता कर सकेंगे कि कीमोथेरेपी की कोई दवा उनके लिए प्रभावशीलता व साइड इफेक्ट्स की दृष्टि से उचित है अथवा नहीं।

टेस्ट विकसित करने वाली कंपनी एक्टन बायोटेक के सीईओ संदीप सक्सेना ने बताया कि कैंसर के मरीज के जीनोटाइपिंग पर आधारित इस टेस्ट का परीक्षण करने के लिए कंपनी ने देशभर के 40 कैंसर रोग विशेषज्ञों से संपर्क किया, जिन्होंने परीक्षण के लिए नमूने भेजे। उन्होंने बताया कि 3000 रुपए की कीमत वाले इस टेस्ट का इस्तेमाल पहले ही करीब 200 मरीजों द्वारा किया जा चुका है। इनमें प्रयोग में सहभागी बने 120 मरीज शामिल हैं।

पुणो के कैंसर रोग विशेषज्ञ सीबी कोप्पिकर के मुताबिक इस टेस्ट ने बहुत सारी संभावनाओं को जन्म दिया है, लेकिन भारतीय मरीजों पर इसके इस्तेमाल के लिए इसे प्रमाणित किए जाने की जरूरत है। गौरतलब है कि पहले यह सुविधा अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों में ही उपलब्ध थी।

मणिपाल लाइफ साइंस सेंटर के प्रमुख डॉ के. सत्यमूर्ति की संस्था ने एक्टन बायोटेक द्वारा तैयार किए गए टेस्ट के परिणाम को सत्यापित किया है। सत्यमूर्ति ने भी भारत में कैंसर के मरीजों की बड़ी संख्या को देखते हुए इस टेस्ट को और विकसित किए जाने पर जोर दिया है।

क्या है जीनोटाइपिंग: जीनोटाइपिंग किसी व्यक्ति का आनुवांशिक गठन निर्धारित करने की प्रक्रिया है, जो जैविक परीक्षण से संपन्न होती है। इससे शरीर में विषैले रसायन तथा दवा के साइड इफेक्ट के साथ ही मरीज पर उसकी प्रभावशीलता का पता लगाने में मदद मिलती है।





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