नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकारों को निर्देश जारी कर कहा है कि वे वाहनों के लिए उच्च सुरक्षा वाली नंबर प्लेटों की योजना को लागू करने संबंधी तौर-तरीकों को छह माह के भीतर अंतिम रूप दें। इस कवायद का मकसद आतंकवादी गतिविधियों में चोरी के वाहनों के उपयोग को रोकना है।
शीर्ष कोर्ट ने गुरुवार को यह निर्देश अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चे के चेयरमैन एमएस बिट्टा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। बिट्टा ने इन रजिस्ट्रेशन (नंबर) प्लेटों को अनिवार्य बनाने और योजना को प्राथमिकता के साथ लागू करवाने की मांग की है।
बिट्टा ने याचिका में कहा कि अधिकतर आतंकी हमलों में फर्जी नंबर प्लेटों वाली चोरी की कारों का इस्तेमाल होता है और इस वजह से सुरक्षा एजेंसियों के लिए आतंकियों को पकड़ना लगभग नामुमकिन हो जाता है। बिट्टा ने जस्टिस अरिजित पसायत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने तर्क दिया कि क्रोमियम आधारित होलोग्राम वाली इन नंबर प्लेटों में बदलाव नहीं किया जा सकता है। साथ ही इन प्लेटों को बनाने वाली मशीन काफी महंगी आती है, जिसके चलते आतंकी या आपराधिक संगठन इन मशीनों को हासिल नहीं कर पाएंगे।