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स्वास्थ्य मंत्री को झटका

सम्पादकीय. पिछले कई दिनों से अलग-अलग मामलों में विवादों को आकर्षित करने वाले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदास को सर्वोच्च न्यायालय ने तगड़ा झटका दिया है। स्वास्थ्य मंत्री की पहल पर सरकार ने संसद में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) संशोधन एक्ट पास करके इसके निदेशक पी वेणुगोपाल को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटा दिया था। न्यायालय ने इसे अवैध करार देकर डॉ. वेणुगोपाल की पुनर्बहाली सुनिश्चित कर दी। हालांकि सरकार के प्रतिनिधि न्यायालय के इस फैसले से ‘विचलित’ न होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जिस तरह स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स निदेशक को निकाल बाहर करने के मुद्दे को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था और इसके लिए संस्थान के संविधान को संशोधित करने की हद तक चले गए, उसके मद्देनजर न्यायालय का फैसला उन्हें मायूस करने के लिए काफी है।

मायूसी का इससे भी बड़ा कारण न्यायालय द्वारा इस केस के बहाने सरकार को दी गई हिदायतें हैं। न्यायालय ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के कामकाज और स्वायत्तता में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ता ही जा रहा है। यह सही है कि सरकारें उन संस्थानों को अपनी जागीर समझती हैं जो सार्वजनिक धन से चलते हैं। यही वजह है कि जब सरकारें बदलती हैं तो आमतौर पर ऐसे संस्थानों के मुखिया भी बदल दिए जाते हैं या उनके लिए ऐसी स्थितियां पैदा कर दी जाती हैं कि वे खुद ही अपनी इज्जत बचाकर चले जाते हैं। लेकिन इतना संकोच जरूर किया जाता रहा है कि कम से कम संस्थान प्रमुखों को उनका शेष कार्यकाल पूरा कर लेने दिया जाए। डॉ. वेणुगोपाल के मामले में यह संकोच भी नहीं किया गया।

असल में सरकार द्वारा उच्च शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण लागू करने के फैसले के विरोध में सबसे मुखर स्वर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों के ही थे। ऐसा समझा जाता था कि इस आंदोलन को प्रोत्साहित करने में संस्थान प्रमुख डॉ. वेणुगोपाल का ही प्रश्रय है। वेणुगोपाल को हटाने के फैसले का संस्थान के भविष्य और बेहतरी से कोई वास्ता नहीं था। न्यायालय के इस फैसले का सबक यही है कि राजनीतिक पार्टियों और सरकारों को अपनी राजनीतिक लड़ाइयों के लिए राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के संस्थानों को मोहरा नहीं बनाना चाहिए वरना जो हाल देश की राजनीति का हुआ है, उसी तरह हमारे सार्वजनिक और शैक्षणिक संस्थान भी बर्बाद होने से नहीं बच पाएंगे।





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