खंडवा. ओंकारेश्वर बांध परियोजना के विस्थापितों को जमीन के बदले जमीन देने के मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने पांच हजार हेक्टेयर जमीन की सूची सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी लेकिन मालवा-निमाड़ के छह जिलों की यह अधिकांश जमीन बंजर है।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को जमीन की सूची 15 अप्रैल तक देने के निर्देश दिए थे। इस पर हुई सुनवाई में नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) की तरफ से स्पष्ट किया गया कि इसमें से अधिकांश जमीन तो सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को भी बताई गई थी। और वर्ष 2000 में परियोजना के शिकायत निवारण प्राधिकरण ने इन जमीनों को खेती योग्य नहीं बताया था।
इसके अलावा शुंगलु कमेटी ने भी इन जमीनों के विषय में यही बात कही थी। एनबीए की इस दलील के बाद १४ मई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में सरकार अपना पक्ष रखेगी और बताएगी कि वह विस्थापितों को कौन सी जमीन उपलब्ध कराएगी।
शिकायत निवारण प्राधिकरण का दौरा- ओंकारेश्वर डूब क्षेत्र के गांवों में 14,15 व 16 मई को शिकायत निवारण प्राधिकरण के सदस्यों का दौरा प्रस्तावित है। इसमें विस्थापितों से चर्चा कर जमीन के बदले जमीन का मामला सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।
जो जमीन है वह बता दी है
* पूरा मामला कोर्ट का है। हमारे पास जो जमीन है वह बता दी। अब विकल्प क्या रह जाता है? कमांड एरिया में जमीन तो नहीं लेकिन रेट दिए जा सकते हैं।
-राजेश डोंगरे, संचालक, नर्मदा हाइड्रो इलेक्ट्रिक डेवलपमेंट कॉपरेरेशन