जयपुर. केरोसीन और गेहूं वितरण में 70 करोड़ रुपए के घपले के आरोपों पर विधायक डॉ. किरोड़ीलाल मीणा संगठन और सत्ता के प्रभावशाली लोगों पर जमकर बरसे। मीणा ने चुनौती दी कि अगर एक पाई की भी गड़बड़ी सामने आए तो वे राजनीति छोड़कर अपने घर चले जाएंगे। उन्होंने अपनी संपत्ति की जांच करवाने की पेशकश भी कर दी।
मीणा ने संगठन महामंत्री प्रकाश चंद्र को लिखे पत्र में कहा कि कुछ लोग प्रायोजित तरीके से उनकी छवि धूमिल करना चाहते हैं। सवाई माधोपुर के पूर्व जिलाध्यक्ष रतनलाल आजाद द्वारा की गई प्रेस कान्फ्रेंस प्रायोजित थी। इसकी जांच करवाई जाए तो पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इसे संगठन के कुछ पदाधिकारियों और सत्ता के बड़े लोगों का वरद हस्त प्राप्त था।
मीणा ने कहा कि आजाद ने यह शिकायत मुख्यमंत्री और वर्तमान खाद्य मंत्री को भी की है, जिसकी मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से जांच करवा चुकी हैं और इस शिकायत को सही नहीं पाया गया। इस प्रकरण की वे भी मंत्री पद पर रहते हुए प्रमुख शासन सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से जांच करवा चुके हैं, जिसकी रिपोर्ट भी संगठन मंत्री को भेजी है। उन्होंने कहा कि आजाद स्वयं पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं। इसकी शिकायतें भी समय-समय पर की जा चुकी हैं।
पीपल्दा में अकाल राहत कार्य में मस्टर रोल में अपना नाम लिखवा कर बिना काम किए मजदूरी उठाना चाहते थे, जिसे उन्होंने रुकवा दिया था। इसी से वे चिढ़े हुए हैं। मीणा ने कहा कि संगठन और सत्ता दोनों स्तर पर वे अपनी संपत्ति की जांच करवाने को तैयार हैं। वैसे उनकी संपत्ति की यह सरकार दो बार जांच करवा चुकी है। इस जांच में क्या मिला, यह तो नहीं पता, लेकिन मीणा का कहना है कि उन्हें इससे भारी धक्का लगा है। संगठन महामंत्री को भेजे पत्र के साथ उन्होंने अपनी संपत्ति का ब्योरा भी भेजा है।
अब मांगी इस्तीफे की इजाजत
डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने विधायक पद से इस्तीफा देने के लिए अनुमति मांगी है। इसके लिए मीणा ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को पत्र लिखा है। 2 अप्रैल को लिखे पत्र में मीणा ने कानून व्यवस्था की बदतर स्थिति पर अपना दर्द जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस की ज्यादती, एक बुजुर्ग पूर्व सैनिक की सार्वजनिक रूप से पिटाई, दलित महिला को पुलिसकर्मी द्वारा लात मारने से गर्भ का गिरना, जैसे कई मामले हैं, जिन्हें देख-सुन पाना संभव नहीं। इसीलिए इस्तीफे की अनुमति मांगी है।
उन्होंने कहा कि आरक्षण के लिए चले गुर्जर आंदोलन के दौरान उनके क्रिया कलाप ऐसे रहे, जिससे राजधर्म पीछे छूट गया। इसी के चलते चोपड़ा कमेटी की रिपोर्ट आने से पहले ही मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।